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सैनिकों ने विकसित की ऐसी तकनीक, आप खाने के साथ कटोरी, प्लेट, चम्मच सब खा जाइए

Mon, 16 Apr 2018 08:00 AM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक Updated Mon, 16 Apr 2018 08:00 AM IST
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eco friendly utensils now you can eat your cutlery
edible cutlery
आप खाना भी खाइए और खाने के साथ और खाने के साथ कटोरी, प्लेट, चम्मच सब खा जाइए। जी हां, डीआरडीओ के लाइफ साइंसेज विभाग ने सैनिकों के लिए ऐसी तकनीक के बर्तन विकसित किए हैं। इन बर्तनों में सैनिक लजीज खाने का लुत्फ लेने के साथ-साथ आने वाले समय में पूरा बर्तन भी खा जाएंगे। ठीक वैसे ही जैसे हम आईसक्रीम की तरह उसका कोन खा जाते हैं। 
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लाइफ साइंसेज विभाग के वैज्ञानिक डा. राकेश कुमार शर्मा के अनुसार इसे एडीबल कटलरी का नाम दिया गया है। डीआरडीओ की इस तकनीक से खाद्य पदार्थों से ही हर तरह के बर्तन का निर्माण किया जा सकता है। इन बर्तनों में ठंडा और गरम खाना खाया जा सकता है। खाना खत्म होने के बाद इन बर्तनों को भी खाने वाले को खा जाने की आजादी रहेगी।
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क्यों विकसित किए ऐसे बर्तन

डा. शर्मा के अनुसार नक्सल इलाकों में नक्सली सुरक्षा बलों की मौजूदी तथा उनकी संख्या की आसानी से जानकारी पा जाते थे। बाद में पाया गया कि सुरक्षा बलों का दस्ता जहां डिस्पोजेबिल बर्तन में अपना लंच आदि लेता है, नक्सली वहां फेंके गए ग्लास, प्लेट, चम्मच की काऊंटिंग करके आसानी से जान लेते थे कि कितने सुरक्षा बल इस क्षेत्र में मौजूद हैं। सुकमा हमले में भी यही निकल कर आया। इसी आधार पर नक्सलियों ने छिपकर सुरक्षा बलों पर हमले की योजना बनाई और सीआरपीएफ जवानों शहीद हो गए। डा. राकेश कुमार शर्मा का कहना है कि इसी से प्रेरणा लेकर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इस तरह के बर्तन का निर्माण किया है। दुरूह इलाके में मीठी दही जमाने का बर्तन भी बनाया है और सैनिकों की जरूरत को ध्यान में रखकर कई अन्य विकास कार्य को आगे बढ़ा रही है। 

बस 16 पैसे से साल भर फिट रहेगा खाना

डीआरडीओ वैज्ञानिक का कहना है कि बिना किसी रसायन या हानिकारक तत्व का इस्तेमाल किए उन्होंने पैकिंग तकनीक का विकास किया है। इसकी लागत महज 16 पैसे प्रति यूनिट आती है। इस तकनीक का इस्तेमाल करके कोई साल भर अपने खाने की गुणवत्ता को पूरी तरह से बनाए रख सकता है। यह पूरी तरह से हानिरहित है और इस्तेमाल के दौरान खाने वाले पूरे स्वाद और ताजगी का एहसास कराएगी। डा. शर्मा का कहना है कि यह तकनीक भी सैनिकों की जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। इसके अलावा सैनिकों को ताजा फलों का जूस से लेकर अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं।
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