इन 9 ममी के रहस्य से हैरान रहे वैज्ञानिक, परेशान इतिहास
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है ना हैरतअंगेज? पर ऐसा है। कुद महीनों पहले ही वैज्ञानिकों को चीन के ताइजाउ के पास जियांगसु प्रांत में ये ममी मिली थी। 700 पुरानी ममी होने के बाद भी वो जरा नहीं बदली थी।
ऑडी के मुताबिक उसका बदन वैसा ही था जैसा रहा होगा। उसके बाल, भौंए, चेहरा और चमड़ी सबकुछ वैसा का वैसा। ऐसा कैसे हो पाया, पता नहीं।
उसके संरक्षण के तरीके को देखकर वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए कि सालों पहले ममीज को दफ्न करने का सही आइडिया क्या रहा होगा। बताया गया कि ये ममी मिंग डायनेस्टी के किसी अमीर औरत की थी।
500 सालों तक ये भी नहीं बदली
ये एक इंका सभ्यता की लड़की की ममी है। इसे एक पहाड़ी के ऊपर ममीफाई किया गया था। ताबूत से जब इस खोला गया, तो सब भौचक्के रह गए।
इस चिली के माउंट लुलैलिको से निकापला गया है। जांच में पाया गया कि ना सिर्फ ऊपर से बिल्कि लड़की के अंदर का बदन भी 700 बाद वैसे का वैसा था जैसे रहा होगा।
उसके दिल और फेफड़े में अभी भी खून मिला। इसी हालत में इस ममी के साथ और दो ममीज भी मिली थीं। उन्हें देखने से ऐसा लग रहा था कि ये बच्चे सो रहें हैं।
लगभग 100 सालों बाद भी वैसी
ममीफाई करने की तकनीक पुरानी है। लेकिन इसे करने वाले अब नहीं बचे हैं। हमें नहीं पता कि कैसे और ठीक-ठीक ढ़ंग से किस तरीके से मिस्र के लोग मृत हो चुके लोगों को ममी बनाने का काम करते थे।
पर, ये मामला नया था। रोजालिया लोमबार्डो इतालवी थी। वो इंफ्लऐंसा होने से मर गई थी। साल 1920 में वो दो साल की थी। उसके पिता ने एल्फ्रेडो सलाफिया को उसकी बच्ची को संरक्षित करने को कहा।
पता नहीं सलाफिया ने कैसे इस काम को अंजाम दिया, पर आप देख सकते हैं कैसे सलाफिया ने बच्ची को प्रिजर्व किया। बच्ची का बदन ही बताता है, कितनी पहले जैसी है वो।
बच्ची का एक्सरे बताता है कि उसके शरीर में सभी ऑर्गन वैसे के वैसे स्थिर हैं और वो पहले जैसी ही है।
सिर में मिला दिमाग निकाल करने वाला औजार
साल 2012 में वैज्ञानिकों को 2400 साल पुरानी ममी मिली। मिस्र की ममीफाई करने की तकनीक बताती है कि वो 3500 साल पुरानी हैं।
ये जिस महिला की ममी थी, जांच बताती हैं कि उसके दिमाग में औजार फंसा हुआ पाया गया। ये वो औजार था जिससे सिर के अंदर से दिमाग को निकाल लिया जाता था।
जांचे ये भी बताती हैं कि उस समय ये प्रक्रिया कठिन होती थी। इस महिला के सिर से ये औजार क्यों मिला, पता नहीं। ये अब तक ऐसी दूसरी ममी है जिसके सिर में ऐसा कुछ पाया गया।
बाद में देखा गया कि इस औजार को रेजिन से भरा जाता था। वैज्ञानिकों ने एंडोस्कोपी कर इस बात को जाना और रेजिन को सिर से निकाल बाहर किया।
10 साल के बच्चे ने खोजी ममी
जर्मनी के एक 10 साल के बच्चे ने ताबूत के अंदर एक ममी को खोजा। ये ताबूत उसे उसकी ही दादी मां के घर मिला। एक्सपर्ट ने ये जानने की पूरी कोशिश की कि कहीं ये कोई नकली चीज तो नहीं हैं।
पता चला कि मिस्र में लोग, पहले ममी बॉडी को अपने पास रखने का भी काम करते थे। इसे कई बार कई तरीकों से एक देश से दूसरे देशों तक भी चेस्ट या यूं कहें कि बक्से में रखकर भेजा जाता था।
इसी तरह गलती से एक बक्सा इस बच्चे के पिता के पास भी कहीं से चला आया था। उन्होंने किसी कोने में इस बक्से को रख दिया था बिना ये जाने की उसमें क्या है। सालों बाद वो खुद हैरत में थे कि उनके घर में एक लाश थी।
जो नहीं थे मिस्र उनको भी किया ममीफाई
चीन के तरीम बेसिन में 2000 साल पुरानी एक ममी की मिली। इस ममी में जो शख्स था उसके बाल लाल रंब के थे और लंबी नाक थी।
पता चला कि ये ममी किसी यूरोपियन की थी। इसके साथ और भी कई ममी पाई गई जो सब की सब यूरापिय ही थी।
पुरातन चीनी लेख बताते हैं कि कुछ कॉशियाई लोग चीन आकर बस गए थे।
इन लोगों ने खुद को बई, यूजी और तोचारियन नाम दिया। लेकिन ये बात ठीक से नहीं पता लगाया जा सका कि ये लोग कौन थे और उन्हें चीन में ममीफाई किया गया।
प्लोमो ममी और रहस्य
स्पेन में प्लोमो ममी बहुत ही लोकप्रिय है। ये एक इंका सभ्यता के बच्चे की ममी है जिसे सेरो ऐल प्लोमो में 1954 में खोजा गया था।
ये एक फ्रोजन यानी के जमी हुई ममी थी जिसे उस जगह से पाया गया जहां इंका सभ्यता के लोग लोगों की बलि देते है। हो सकता है इस बच्चे की बलि ही दी गई हो, ये रहस्य है।
इस ममी को नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री, सैटियागो चीली में रखा गया। लेकिन लोगों के दर्शन के लिए इसकी एक नकली हमशक्ल या यूं कहें कि रेप्लिका को लोगों के लिए रखा गया है।
मिली और भी बच्चों की ममी
अगर आपको ये लगता है कि केवल व्यस्क ममी ही बातों और सवालों का मुद्दा बनी, तो ऐसा नहीं है। आपको बता दें कि इंका सभ्यता से ऐसे और भी कई बच्चे पाए हैं जिनकी ममी बनाई गई।
ये कभी रस्सियों तो कभी किसी खास तरह के तेल के अंदर संरक्षित पाए गए। बड़ी मात्रा में बच्चों को ममी बनाने का सिलसिला लंबा था और ऐसा किसी एक वजह से क्यों, पता नहीं चल पाया।
पर स्टडी बताती हैं कि ये ऐपस नाम के भगवान को खुश करने के लिए किया जाता था। उनके लिए बच्चों की बलि दी जाती थी। ये बात कितनी सत्य है, इसके प्रमाण नहीं मिल पाएं हैं।