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जहरीले मेढकों से बचाने के लिए गोह को दी जा रही है ट्रेनिंग

Sun, 10 Jan 2016 10:37 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 10 Jan 2016 10:37 AM IST
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some lizards trained not to eat toxic toads in australia

जहरीले मेढ़कों से पर्यावणरण के संतुलन को बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक यहां गोह को ट्रेनिंग दे रहे हैं। वैज्ञानिक ऑस्ट्रेलिया के खेतों में पाई जाने वाली गोह को यह ट्रेनिंग देने में कामयाबी हासिल की है वो जहरीले मेढ़कों को न खाएं।

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बीबीसी के अनुसार, वैज्ञानिकों ने गोहों को ट्रेनिंग देने का काम संभव बनाया है छोटे-छोटे कम जहरीले मेढ़क खिलाकर। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस गोह ने गलती से जहरीला मेढ़क खा लिया है उसने दोबारा कभी भी जहरीले मेढ़कों को खाने की गलती नहीं की।
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मामले पर आस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रयोग को अभी और आगे बढ़ाया जाएगा जिससे कि ऑस्ट्रेलिया उपमहाद्वीप के पर्यावरणीय संतुलन को बरकरार रखने में मदद मिल सके। क्योंकि जहरीले मेढ़कों के कारण गोह की आबादी बहुत तेजी से घटी है। इस प्रयोग से जुड़ी व्यापक रिपोर्ट रॉयल सोसाइटी जर्नल, बॉयोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित हुई है।

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1930 में लाए गए थे जहरीले मेढ़क

some lizards trained not to eat toxic toads in australia

सिडनी विश्वविद्यालय से जुड़े और प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक ने कहा है कि वह गोह को दी गई ट्रेनिंग से काफी हैरान हैं। उन्होंने जिन गोहों को ट्रेनिंग दी है वह यह ज्ञान प्राप्त करने में सफल हुई हैं कि जिंदा रहने के लिए जहरीले मेढ़कों को नहीं खाना है।

खास बात यह भी है कि जिस इलाके में गोहों को ट्रेनिंग दी जा रही है उस इलाके अधिकांश मेढ़कों की प्र‌जाति जहरीली है।

बताया जा रहा है ऑस्ट्रेलिया में 1930 में गन्ने के खेत में लगने वाले कीड़ों से मुक्ति पाने के लिए ये जहरीले मेढ़क बाहर से लाए गए थे। लेकिन अब ये मेढ़क इतना ज्यादा बढ़ गए हैं क‌ि इससे पर्यावणीय संतुलन ही खराब हो रहा है।

क्योंकि ये मेढ़क आबादी बढ़ने के साथ जैसे की नए इलाके में जाते हैं जो वहां मौजूद गोह इन्हें खा लेते हैं और फिर जहर के कारण उनकी मौत हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि अगर कोई गोह इन धब्बेदार मेढ़कों को अगर 30 सेकंड के लिए भी मुंह पर रखती है तो उसकी मौत निश्चित है।

वैज्ञानिको ने गोहों के जीवन पर व्यापक अध्ययन के लिए विविन्न यंत्रों और तकनीको के जरिए सैकड़ों गोहों पर प्रयोग ‌किए हैं।

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