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'गणेश का अवतार' कहा जाने वाले आदमी की मजबूर जिंदगी
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Fri, 04 Mar 2016 03:29 PM IST
सार
- फेशियल ट्यूमर का शिकार
-
- इलाज को नहीं समर्थ
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कनई
- फोटो : daily mail
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विस्तार
भगवान भी किसी किसी इंसान को इतना अलग बना कर भेजता है कि देखने वाला देखता रह जाए। यह है 42 साल का कनई दास जिसका चेहरा कुछ इस तरह का दिखता है।
हर सुबह कनई रेलवे स्टेशन पर जा कर इस उम्मीद से भीख मांगता है कि उसकी हालत देख कर लोग उसे कुछ पैसे दे देंगे। लेकिन इसके बारे में कुछ और भी खास बात है।
इसके कई पड़ोसियों के लिए कनई भगवान गणेश का अवतार है। गणेश की तरह इसकी सूड़ भले ही न हो लेकिन लोग इसे भगवान की तरह ही पूजते हैं और भक्ति में इस पर पैसे चढ़ाते हैं।
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हर सुबह कनई रेलवे स्टेशन पर जा कर इस उम्मीद से भीख मांगता है कि उसकी हालत देख कर लोग उसे कुछ पैसे दे देंगे। लेकिन इसके बारे में कुछ और भी खास बात है।
इसके कई पड़ोसियों के लिए कनई भगवान गणेश का अवतार है। गणेश की तरह इसकी सूड़ भले ही न हो लेकिन लोग इसे भगवान की तरह ही पूजते हैं और भक्ति में इस पर पैसे चढ़ाते हैं।
कनई की जिंदगी नहीं आसान
कनई
- फोटो : daily mail
कनई एक दुर्लभ बीमारी का शिकार है जिसके कारण उसके चेहरे की त्वचा नीचे सीने तक लटक आई है और उसकी दाई आंख पूरी तरह गायब हो चुकी है। ये न ढंग से खा पाता है न बोल पाता है। वे कहता है, ''मैं भीख नहीं मांगना चाहता लेकिन मेरी बीमारी की वजह से मुझे कोई नौकरी नहीं मिलती इसलिए अपनी मां का ख्याल रखने केलिए मुझे भीख मांग कर काम चलाना पड़ता है।''
पश्चिम बंगाल के बरुईपुर के रहने वाले कनई दास बताते हैं कि उनकी यह हालत हमेशा से नहीं थी। पहले उन्हें दोनों आंखों से दिखता था लेकिन पिछले कुछ सालों में मांस का यह लोथड़ा बढ़ गया है। ये जब पैदा हुए थे तो सिर पर एक गांठ सी थी। 9 साल के उम्र तक यह इतनी बढ़ गई कि आंख भी ढकने लगी।
कनई की ऐसी हालत देख कर उसकी असली मां ने उसे बेदखल कर दिया। कनई रेलवे स्टेशन के कचड़े के डिब्बे से अपना पेट भरने को मजबूर हो गया। तब एक दुकानदार भारती रॉय ने उसका हाथ थामा।
पश्चिम बंगाल के बरुईपुर के रहने वाले कनई दास बताते हैं कि उनकी यह हालत हमेशा से नहीं थी। पहले उन्हें दोनों आंखों से दिखता था लेकिन पिछले कुछ सालों में मांस का यह लोथड़ा बढ़ गया है। ये जब पैदा हुए थे तो सिर पर एक गांठ सी थी। 9 साल के उम्र तक यह इतनी बढ़ गई कि आंख भी ढकने लगी।
कनई की ऐसी हालत देख कर उसकी असली मां ने उसे बेदखल कर दिया। कनई रेलवे स्टेशन के कचड़े के डिब्बे से अपना पेट भरने को मजबूर हो गया। तब एक दुकानदार भारती रॉय ने उसका हाथ थामा।