हैरतअंगेज! डॉक्टरों ने दस महीने के बच्चे को पिलाई भांग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दस महीने के बच्चे कितने छोटे होते हैं। लेकिन ऐसे बच्चे प्यारे तब लगते हैं जब वो हंसते-खिलखिलाते रहें या रोए और परेशान करे।
डेली मेल के मुताबिक दस महीने के ऑलिवर ऑसबर्न की कहानी पूरी तरह से अलग है। वो माइग्रेटिंग पार्शियल ऐपिलेप्सी का शिकार है।
इस बीमारी के वजह से उसे पालने में ही पड़े पड़ रोज 100 से ज्यादा बार झटके आते हैं। इन दौरों में वो अपना होश खो बैठता है और सही वक्त पर इलाज न मिलने पर भगवान को भी प्यारा हो सकता है।
नहीं जिंदा बचेगा
डॉक्टरों का कहना है कि दौरे आने की ये बीमारी दुर्लभ है और इस बीमारी के साथ बच्चा ज्यादा से ज्यादा सात सालों तक जिंदा रह सकता है।
एक बार ऐसे ही उस नन्हे बच्चे का दौरा पड़ गया। दौरा इतना भयंकर आया कि उसे होश ही नहीं आ रहा था।
उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने उसके जीभ के नीचे थोड़ी सी लिक्विड अफीम डाली। दौरे को रोकने के लिए डॉक्टरों की ये कोशिश रंग लाई और बच्चा होश में आ गया।
चाहिए मदद
इसलिए उन लोगों ने शहर बदलने के साथ-साथ लोगों से रूपए की भी मांग की है।
जाल में फंसी मछलियों को एक बार में निगल गई शार्क
बुलबुल के मल से बना फेशियल लगवा रही औरतें, मर्द भी हुए दीवाने