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गंगा में आस्था के नाम पर ये क्या कर रहे हैं लोग? घाटों पर दिखने लगा कचरा; हरिद्वार की तस्वीरें बढ़ाएंगी चिंता
Thu, 22 Oct 2026 11:21 AM IST
दीक्षा पाठक
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Thu, 22 Oct 2026 11:21 AM IST
सार
Viral Video: हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद गंगा घाटों पर कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन नजर आने लगी हैं। इससे गंगा की सफाई और जलीय जीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं सफाई में जुटी हैं। वहीं, ज्योतिषाचार्यों ने श्रद्धालुओं से गंगा को साफ रखने की अपील की है।
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गंगा में आस्था या गंदगी?
- फोटो : इंस्टाग्राम@apnaa.haridwar
विस्तार
गंगा नदी को करोड़ों लोग मां का दर्जा देते हैं। लोग दूर-दूर से यहां स्नान करने और पूजा-पाठ करने आते हैं। मान्यता है कि गंगा में डुबकी लगाने से पापों से मुक्ति मिलती है। लेकिन जिस नदी को लोग इतना पवित्र मानते हैं, उसी में जब कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन जैसी चीजें नजर आने लगें, तो सवाल उठना लाजिमी है। हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद कुछ ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं। गंगा की धारा कम होने से घाटों पर जमा कचरा दिखाई देने लगा है। जगह-जगह पुराने कपड़े और प्लास्टिक की चीजें नजर आ रही हैं, जिससे गंगा की सफाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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गंगनहर बंद होते ही सामने आई गंदगी
दरअसल, हर साल दशहरे से लेकर दिवाली तक गंगनहर में पानी की सप्लाई रोककर सफाई और रखरखाव का काम किया जाता है। इस दौरान पानी का बहाव कम होने पर नदी और घाटों पर जमा गंदगी साफ दिखाई देने लगती है। हरिद्वार में भी गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद घाटों पर कपड़े, पॉलीथीन और प्लास्टिक का कचरा नजर आ रहा है। गंगा की सतह और रेलिंग के आसपास भी कई जगह पुराने कपड़े दिखाई दे रहे हैं।
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प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं जुटीं
यह नजारा इसलिए भी चिंता बढ़ाता है क्योंकि प्लास्टिक और पॉलीथीन से नदी का पानी प्रदूषित हो सकता है। वहीं, पानी में मौजूद जलीय जीवों को भी नुकसान पहुंच सकता है। गंगा की सफाई के लिए प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं जुटी हुई हैं, लेकिन लोगों की भागीदारी के बिना नदी को साफ रखना आसान नहीं है।
ज्योतिषाचार्य ने श्रद्धालुओं से की खास अपील
गंगा में बढ़ती गंदगी को लेकर नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी और ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने भी श्रद्धालुओं से अपील की है। उनका कहना है कि प्लास्टिक, पॉलीथिन और पुराने कपड़े पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गंगा में स्नान और पूजा-पाठ करने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि आस्था के साथ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। पूजा सामग्री, पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलिथीन को गंगा में डालना सही नहीं है।
आस्था के साथ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी
गंगा को स्वच्छ रखने के लिए सिर्फ प्रशासन और सफाई अभियान पर निर्भर रहना काफी नहीं है। श्रद्धालुओं को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। पुराने कपड़े और पूजा सामग्री नदी में डालने के बजाय उनके उचित निपटारे का इंतजाम करना चाहिए। छोटी-छोटी सावधानियों से गंगा में कचरा जाने से रोका जा सकता है। आखिर जिस नदी को लोग जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानते हैं, उसे साफ रखना भी उनकी आस्था का ही हिस्सा होना चाहिए।