अपनी खिदमत कराने के लिए पांडा ने किया प्रेगनेंट होने का नाटक!
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टीवी सीरियलों में तो आपने अक्सर औरतों को प्रेगनेंसी का नाटक करते देखा होगा। लेकिन, क्या कभी आपने किसी जानवर जैसे की मादा पांडा को ऐसा करते हुए सुना है?
नहीं ना। तो हम आपको बताते हैं कि चीन के चेंगडु जायन्ट पांडा ब्रीडिंग रिसर्च सेंटर में अई हिन नाम के बारे में। उसने ऐसा ही किया है।
जी हां। एसएमएच डॉट कॉम की मानें तो रिसर्च सेंटर के अधिकारी पांडा को बच्चा पैदा करते हुए लाइव ब्रॉडकास्ट करने वाले थे। वो हैरानी में तो तब आ गए जब उन्होंने देखा कि वो तो प्रेगनेंट ही नहीं है।
बनाया बहुत बेवकूफ
छह साल की इस मादा पांडा ने पिछले दो महीनों से ऐसी हरकतें कि जिसे देखकर सेंटर के लोगों को लगा कि वो गर्भ से है।
ऐसा महसूस होते है उसे खाने के लिए बढ़िया खाना, एयर कंडिशन केज और हर वक्त देख-भाल के लिए कोई ना कोई बंदा नियुक्त कर दिया गया।
पांडा भी किसी प्रेगनेंट पांडा की तरह ही गुमसुम, चुपचाप और एक जगह ही बैठकर रहने लगी। बाद में पता चला कि वो बढ़िया खातिरदारी के लिए ऐसा कर रही थी।
ये थी स्यूडो प्रेगनेंसी
आप स्यूडो प्रेगनेंटी टर्म से कितने वाकिफ हैं? ये एक तरह की प्रेगनेंसी का फेज होता है जिसमें मादा को लगता है और वो ऐसा जताती है जैसे वो प्रेगनेंट है।
लेकिन, असल में ऐसा कुछ नहीं होता है। इंसानों में भी ऐसे कई बार केसेज रिपोर्ट हुए हैं जहां औरत को नौ महीने तक लगता है कि वो प्रेगनेंट है, पर ऐसा कुछ भी नहीं होता।
पांडा में इस तरह की फेक प्रेगनेंसी को फैंटम प्रेगनेंसी का भी नाम दिया गया है। सेंटर के वैज्ञानिकों ने बताया कि मशीनी रूप से ये पता लगा पाना मुश्किल होता है कि पांडा प्रेगनेंट है या नहीं।
क्योंकि वो तो बहुत बड़ी होती है लेकिन उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण इतना छोटा कि अल्ट्रासांउड में कुछ भी पता नहीं चल पाता है।
पहले भी आए ऐसे मामले
खबर आते ही वैज्ञानिकों ने ये साफ कर दिया कि अक्सर ऐसा होता रहता है कि पांडा अपने ही प्रेगनेंट होने का नाटक करते हैं।
फेक प्रेगनेंसी वो तब भी करते हैं जब उन्हें ब्रीड करने का मौका नहीं मिलता। कई बार ऐसा भी होता है कि कई बार फेक प्रेगनेंसी में गर्भ में फीटस तो असली में होता है, लेकिन जन्म से काफी पहले ही उसका मिसकैरिज हो जाता है।
आपको चलते-चलते बता दें कि गर्भ में एक पांडा बढ़ने और पैदा होने के लिए ज्यादा से ज्यादा 50 दिनों का समय लेता है। साथ ही ये भी कि पांडा दो या तीन सालों में एक ही बार मेटिंग करते हैं।