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Scrappage Policy: अगर आप पुरानी गाडी को कराना चाहते हैं स्क्रैप तो यह है पूरा प्रोसेस, आपको मिलेंगे ये फायदे

Thu, 25 Nov 2021 01:35 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Nov 2021 01:35 PM IST
सार

व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी में 15 साल पुरानी पेट्रोल-डीजल कार को स्क्रैप किए जाने का नियम बनाया गया है। वहीं राजधानी दिल्ली में पेट्रोल या CNG कार के 15 वर्ष पुराना होने पर इसे एनसीआर में चलाने के लिए अनफिट माना जाएगा। जबकि डीजल वाहन की उम्र 10 साल है...

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what is Scrappage Policy: how to get your old car scrapped and know the process, and how get up to 25 per cent road tax concession for new car purchased after scrapping old ones
15 years old vehicles scrap - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश में अब पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराना आसान हो गया है। अभी तक ये सेक्टर अनऑर्गेनाइज्ड था। हाल ही में नोएडा में Maruti Suzuki और Toyota Tsusho ने मिल कर पुरानी गाड़ियों के रिसाइकल सेंटर की शुरुआत की है। हालांकि महिंद्रा ने साल 2018 में ही व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर की शुरुआत कर दी थी। वहीं उम्मीद जताई जा रही है कि मारुति सुजुकी के आने के बाद देश के बाकी शहरों में भी रिसाइकल सेंटर खुलेंगे। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक देश के हर जिले में तीन-चार स्क्रैप सेंटर खोलने की सरकार की योजना है, सरकार इसके लिए प्राइवेट कंपनियों के साथ करार कर रही है। मारुति और महिंद्रा के अलावा टाटा मोटर्स भी गुजरात में स्क्रैप सेंटर खोलने की तैयारी कर रही है, जिसमें हर साल तकरीबन 36 हजार गाड़ियां स्क्रैप की जाएंगी। वहीं अगर आप भी अपनी कोई गाड़ी स्क्रैप में देना चाहते हैं, तो हम बता रहे हैं कि गाड़ी को स्क्रैपिंग सेंटर में देने का क्या है तरीका और बदले में आपको क्या फायदे मिलेंगे...

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स्क्रैपिंग सेंटर से करें संपर्क

अगर आपनी कोई पुरानी गाड़ी स्क्रैप में देना चाहते हैं, तो आपको ऑथराइज्ड रिसाइकलर से संपर्क करना होगा। आप CERO या MSTI के वेबपेज पर भी जाकर संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपाइंटमेंट लेना होगा। अगर आपका व्हीकल चालू हालत में है तो सीधे स्क्रैपिंग सेंटर ले जा सकते हैं या फिर उन्हें डोरस्टेप पिकअप के लिए भी अनुरोध कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको पिकअप चार्जेज देने होंगे।     

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डॉक्यूमेंट्स करें पूरा

रिसाइकल सेंटर पर आपको गाड़ी के ऑरिजनल दस्तावेज देने होंगे। स्क्रैपिंग सेंटर पर देने से पहले रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट संभाल कर रख लें। साथ ही व्हीकल हैंडओवर करने से पहले आपका एक पहचान पत्र भी मांगा जाएगा। इसके अलावा अगर वाहन का कोई चालान, बैंक लोन, एक्सीडेंट या कोई इंश्योरेंस क्लेम है, तो भी आपको सभी कानूनी प्रक्रियाएं पहले पूरी करनी होंगी, इसके बाद ही वाहन रिसाइकल किया जाएगा। इसके साथ ही फॉर्म 2 में डिटेल्स भरकर ऑथराइज्ड स्क्रैप डीलर को एक कॉपी देनी होगी, जो मालिकाना हक के ट्रांसफर के प्रमाण के तौर पर एक सर्टिफिकेट देगा। कार के मालिक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि व्हीकल को स्क्रैप किए जाने से पहले उसका चेसिस नंबर हटा दिया जाए।

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स्क्रैपिंग प्रक्रिया

इन सभी कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आपके वाहन को स्क्रैपिंग के लिए भेजा जाएगा। सबसे पहले गाड़ी के टायर और अगर सीएनजी किट लगी हुई है, उसे निकाला जाएगा। इसके बाद बैटरी और गाड़ी के एयर कंडीशनिंग सिस्टम से रेफ्रिजरेंट को खाली किया जाएगा। कार के जरूरी कॉम्पोनेंट/पार्ट्स को इसलिए अलग किया जाता है ताकि उन्हें दोबारा काम में लाया जा सके। इसके बाद व्हीकल को डी-पॉल्यूशन स्टेशन भेजा जाएगा, जहां गाड़ी से सभी तरह का लिक्विड, इंजन ऑयल, ट्रांसमिशन ऑयल, ब्रेक ऑयल, स्टीयरिंग ऑयल, कूलंट और विंडशील्ड वाशर फ्लुइड को निकाला जाएगा। बैटरी, मेटल, ऑयल, कूलेंट को ग्लोबल एनवायरमेंट स्टैंडर्ड के अनुसार नष्ट किए जाता है ताकि फिर से इस्तेमाल न किया जा सके। साथ ही गाड़ी के फ्यूल टैंक और साइलेंसर को भी यहीं निकाला जाता है।


इसके बाद बारी आती है गाड़ी के बॉडी पैनल्स और बोनेट, बूट लि़ड, डोर्स, फेंडर्स, बंपर्स, हेडलाइट्स और टेल लाइट्स को मैनुअली तरीके से निकाला जाता है। इसके बाद केबिन के अंदर स्टीयरिंग और डैशबोर्ड से लेकर सीटों, फ्लोर मैट्स, रूफ लाइनिंग और अन्य सभी इंटीरियर हिस्सों को निकाला जाता है। साथ ही कार के वायरिंग हार्नेस भी हटा दिया जाता है। अगले स्टेशन पर कार से इंजन, सस्पेंशन और ब्रेक्स को हटाने के बाद आखिर में व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी VIN प्लेट को काटने की बारी आती है।   

कार की बॉडी

इसके बाद कार की बॉडी बचती है, जिसे क्रेन के जरिए उठाया जाता है और फिर क्रशर में डाला जाता है। कार से निकले स्टील को गलाने के लिए बेचा जाता है। वहीं गाड़ी से निकले बॉडी पैनल्स और पार्ट्स को भी बेचा जाता है। रिसाइकल सेंटर में आपको आश्वस्त किया जाता है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एसी गैसों या ऑयल को जमीन या हवा में नहीं छोड़ा जाता है कि पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट

एक बार स्क्रैपिंग की पूरी हो जाने के बाद, रिसाइकल सेंटर आपको 'सर्टिफेकट ऑफ डेस्ट्रक्शन' उपलब्ध कराएगा, जिसका उपयोग वाहन को डी-रजिस्टर कराने के लिए आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) में किया जा सकता है। इस सर्टिफिकेट में आपकी गाड़ी से जुड़ी जानकारियां जैसे मॉडल और रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा होगा, साथ ही स्क्रैप की तारीफ भी लिखी होती है। आरटीओ में आपकी गाड़ी के नंबर को रिमूव कर दिया जाता है, ताकि उसका कोई गलत इस्तेमाल न कर सके। गाड़ी के स्क्रैप मूल्य का भुगतान आपको ऑनलाइन या चेक के जरिए भी किया जा सकता है।

क्या होंगे फायदे

पुरानी गाड़ी को कबाड़ में देने और ग्राहकों को स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट दिखाने पर नई गाड़ी के एक्स-शोरूम कीमत पर 5 फीसदी की छूट मिलेगी। वहीं कुछ राज्यों में ग्राहकों को नई गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के समय रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर दी जाएगी। नई स्क्रैप पॉलिसी के तहत नई गाड़ी लेने पर रोड टैक्स में तीन साल के लिए 25 फीसदी तक छूट मिलेगी। नई पॉलिसी लागू होने के बाद राज्य सरकारें प्राइवेट गाड़ियों पर 25 फीसदी और कमर्शियल गाड़ियों पर 15 फीसदी तक छूट दे सकती हैं। वहीं ये बात ध्यान रखनी होगी कि सरकार के मुताबिक आठ साल बाद ट्रांसपोर्ट गाड़ियों और 15 साल बाद नॉन-ट्रांसपोर्ट गाड़ियों को मोटर व्हीकल टैक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी। यानी कि स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत अगर सरकार से छूट लेनी है तो ट्रांसपोर्ट व्हीकल को 8 साल पहले और नॉन-ट्रांसपोर्ट व्हीकल को 15 साल से पहले स्क्रैप कराना होगा।



हाल ही में घोषित व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी में 15 साल पुरानी डीजल कार और 15 साल पुरानी पेट्रोल कार को स्क्रैप किए जाने का नियम बनाया गया है। वहीं राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पेट्रोल या CNG कार के 15 वर्ष पुराना होने पर इसे एनसीआर में चलाने के लिए अनफिट माना जाएगा। जबकि डीजल वाहन की उम्र 10 साल है। हालांकि, देशभर में अब कारों का फिटनेस टेस्ट किया जाएगा। कार के इंश्योरेंस के लिए अफिटनेस टेस्ट सर्टिफिकेट देना जरूरी हो जाएगा। वहीं जो कार इस फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाती है तब उसे स्क्रैप के लिए भेजा जाएगा।

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