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China: ऑटो इंडस्ट्री के लिए क्यों जरूरी है 'रेयर अर्थ मेटल', सप्लाई रुकने से कार कंपनियों को क्या हैं नुकसान?
Fri, 06 Jun 2025 04:46 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 06 Jun 2025 04:46 PM IST
सार
China Rare Earth Metal Export: चीन द्वारा रेयर अर्थ मेटल के एक्सपोर्ट पर लगाई गई रोक से दुनियाभर की ऑटो कंपनियों की फैक्ट्रियों में ताले लगाने की नौबत आ गई है। जानिए ये धातुएं ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में कितनी जरूरी हैं और चीन ने इसका निर्यात क्यों रोका।
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कार प्लांट
- फोटो : Freepik
विस्तार
चीन द्वारा कीमती धातुओं (रेयर अर्थ मेटल) के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगाने का असर अब दुनियाभर की ऑटोमोबाइल कंपनियों पर दिखने लगा है। सुजुकी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज समेत कई कंपनियों ने उत्पादन प्रभावित होने की बात कही है। मारुति सुजुकी की पैरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन को जापान में अपने पॉपुलर मॉडल स्विफ्ट (SWIFT) का प्रोडक्शन रोकना पड़ा है।
वहीं, यूरोप की भी कुछ ऑटो कंपनियां भी चीन के इस फैसले से परेशानी में पड़ गई है और प्रोडक्शन बंद कर दिया है। इसमें फोर्ड, निसान, BMW और मर्सिडीज जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनियों का कहना है कि अगर इस मसले का हल जल्द नहीं ढूंढा गया तो फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है। चीन की पाबंदी का असर भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी पड़ने वाला है, इसलिए अगले हफ्ते एक भारतीय दल चीन जाएगा। आइए जानते हैं आखिर रेयर अर्थ मेटल क्या होते हैं और इनकी कमी से दुनियाभर की कार कंपनियों की फैक्टरियों पर ताला लगाने की नौबत क्यों आ गई है।
रेयर अर्थ मेटल में चीन की 90% हिस्सेदारी
बता दें कि कार, ड्रोन और रोबोट से लेकर एयरक्राफ्ट के पार्ट्स तक बनाने में इस्तेमाल होने वाले बेशकीमती धातुओं (रेयर अर्थ मेटल) का 90% उत्पादन अकेले चीन करता है। वहीं, इसकी माइनिंग पर चीन की हिस्सेदारी 70% से अधिक है। इससे पता लगाया जा सकता है कि चीन इन धातुओं के बाजार का अकेला मालिक है। चीन ने हाल ही में अमेरिका के साथ बढ़ती ट्रेड वॉर के बीच सात कीमती धातुओं (रेयर अर्थ मेटल) के निर्यात पर रोक लगा दी थी।
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वहीं, कारों के प्रोडक्शन में प्रमुखता से इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट पर भी चीन ने पाबंदी लगाई हुई है। ये मैग्नेट सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस बिजनेस के लिए भी बेहद अहम हैं।
इन रेयर अर्थ मेंटल पर चीन ने लगाई है रोक
गाड़ियों को बनाने में सबसे ज्यादा मात्रा में स्टील का इस्तेमाल होता है, लेकिन कुछ पार्ट्स को तैयार करने में रेयर अर्थ मेटल का इस्तेमाल किया जाता है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कुल 7 तरह के रेयर अर्थ मेटल का उपयोग होता है। इनमें समेरियम सबसे ज्यादा चर्चा में है जिसका इस्तेमाल चुंबक बनाने में किया जाता है। इस मेटल से बने चुंबक हाई टेम्प्रेचर पर भी अपनी ताकत नहीं खोते। इससे बने चुंबकों का इस्तेमाल मिसाइल गाइडेड सिस्टम, टर्बाइन, इलेक्ट्रिक मोटर में किया जाता है। समेरियम के अलावा, गैडोलिनियम, टरबियम, डिसप्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम जैसे धातुओं का भी इस्तेमाल होता है।
क्या है एक्सपोर्ट पर रोक की वजह?
चीन ने 4 अप्रैल को इन सात कीमती धातुओं के निर्यात पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। चीन इन धातुओं और मैग्नेट का एक्सपोर्ट सिर्फ एक स्पेशल परमिट के साथ ही कर रहा है। कंपनियों को चीन से इनमें से कुछ धातुओं को मंगाने के लिए 'एंड-यूज सर्टिफिकेट' देना होगा। इसमें यह बताना पड़ेगा कि इन धातुओं का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा।
चीन के इस कदम से साफ है कि वह माइनिंग इंडस्ट्री पर अपने दबदबे का फायदा उठाना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका से चल रहे टैरिफ वार में चीन अपना पलड़ा भारी करने के लिए रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात को नियंत्रित कर अमेरिका समेत प्रतिरोधी देशों पर दबाव बनाना चाहता है।
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वहीं, यूरोप की भी कुछ ऑटो कंपनियां भी चीन के इस फैसले से परेशानी में पड़ गई है और प्रोडक्शन बंद कर दिया है। इसमें फोर्ड, निसान, BMW और मर्सिडीज जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनियों का कहना है कि अगर इस मसले का हल जल्द नहीं ढूंढा गया तो फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ सकता है। चीन की पाबंदी का असर भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी पड़ने वाला है, इसलिए अगले हफ्ते एक भारतीय दल चीन जाएगा। आइए जानते हैं आखिर रेयर अर्थ मेटल क्या होते हैं और इनकी कमी से दुनियाभर की कार कंपनियों की फैक्टरियों पर ताला लगाने की नौबत क्यों आ गई है।
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रेयर अर्थ मेटल में चीन की 90% हिस्सेदारी
बता दें कि कार, ड्रोन और रोबोट से लेकर एयरक्राफ्ट के पार्ट्स तक बनाने में इस्तेमाल होने वाले बेशकीमती धातुओं (रेयर अर्थ मेटल) का 90% उत्पादन अकेले चीन करता है। वहीं, इसकी माइनिंग पर चीन की हिस्सेदारी 70% से अधिक है। इससे पता लगाया जा सकता है कि चीन इन धातुओं के बाजार का अकेला मालिक है। चीन ने हाल ही में अमेरिका के साथ बढ़ती ट्रेड वॉर के बीच सात कीमती धातुओं (रेयर अर्थ मेटल) के निर्यात पर रोक लगा दी थी।
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वहीं, कारों के प्रोडक्शन में प्रमुखता से इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट पर भी चीन ने पाबंदी लगाई हुई है। ये मैग्नेट सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस बिजनेस के लिए भी बेहद अहम हैं।
इन रेयर अर्थ मेंटल पर चीन ने लगाई है रोक
गाड़ियों को बनाने में सबसे ज्यादा मात्रा में स्टील का इस्तेमाल होता है, लेकिन कुछ पार्ट्स को तैयार करने में रेयर अर्थ मेटल का इस्तेमाल किया जाता है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कुल 7 तरह के रेयर अर्थ मेटल का उपयोग होता है। इनमें समेरियम सबसे ज्यादा चर्चा में है जिसका इस्तेमाल चुंबक बनाने में किया जाता है। इस मेटल से बने चुंबक हाई टेम्प्रेचर पर भी अपनी ताकत नहीं खोते। इससे बने चुंबकों का इस्तेमाल मिसाइल गाइडेड सिस्टम, टर्बाइन, इलेक्ट्रिक मोटर में किया जाता है। समेरियम के अलावा, गैडोलिनियम, टरबियम, डिसप्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम जैसे धातुओं का भी इस्तेमाल होता है।
क्या है एक्सपोर्ट पर रोक की वजह?
चीन ने 4 अप्रैल को इन सात कीमती धातुओं के निर्यात पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। चीन इन धातुओं और मैग्नेट का एक्सपोर्ट सिर्फ एक स्पेशल परमिट के साथ ही कर रहा है। कंपनियों को चीन से इनमें से कुछ धातुओं को मंगाने के लिए 'एंड-यूज सर्टिफिकेट' देना होगा। इसमें यह बताना पड़ेगा कि इन धातुओं का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा।
चीन के इस कदम से साफ है कि वह माइनिंग इंडस्ट्री पर अपने दबदबे का फायदा उठाना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका से चल रहे टैरिफ वार में चीन अपना पलड़ा भारी करने के लिए रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात को नियंत्रित कर अमेरिका समेत प्रतिरोधी देशों पर दबाव बनाना चाहता है।