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BEST: मुंबई की आइकॉनिक डबल डेकर बस बनीं अतीत का हिस्सा, भावनात्मक विदाई के साथ यात्रा पर लगा विराम
Sat, 16 Sep 2023 11:47 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 16 Sep 2023 11:47 AM IST
सार
मुंबई ने शुक्रवार को अपनी प्रतिष्ठित डबल डेकर बसों को भावनात्मक विदाई दी। लाल रंग की दो-डेक वाली बसों की अंतिम कुछ यूनिट्स, जो सिर्फ डीजल पर चलती थीं, ने अपनी अंतिम सवारी की और इनकी 80 वर्षों से ज्यादा की यात्रा पर विराम लग गया।
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Double-Decker Bus Mumbai
- फोटो : PTI
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विस्तार
मुंबई ने शुक्रवार को अपनी प्रतिष्ठित डबल डेकर बसों को भावनात्मक विदाई दी। लाल रंग की दो-डेक वाली बसों की अंतिम कुछ यूनिट्स, जो सिर्फ डीजल पर चलती थीं, ने अपनी अंतिम सवारी की और इनकी 80 वर्षों से ज्यादा की यात्रा पर विराम लग गया। इन प्रतिष्ठित बसों को अब शहर के एक संग्रहालय में देखा जा सकता है क्योंकि परिवहन के नए तौर-तरीकों को अहमियत दी जा रही है। मुंबई ने हाल ही में सड़कों से प्रदूषण फैलाने वाले सार्वजनिक परिवहन वाहनों को साफ करने के लिए इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसें शुरू की हैं।
बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) द्वारा संचालित लाल डबल-डेकर बसें शहर की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की कुंजी रही हैं, क्योंकि इसकी शुरुआत भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने से पहले ही हुई थी। 1937 से, डबल डेकर बसें न सिर्फ कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा रही हैं, बल्कि शहर की पहचान और लाखों लोगों की बचपन की अभिन्न यादों का हिस्सा भी बन गई हैं।
मुंबई में लगभग 900 ऐसी डीजल से चलने वाली डबल-डेकर बसें थीं जो शहर में अपने दौर में चलती थीं। बाद में परिचालन की ज्यादा लागत सहित कई वजहों से इन बसों की संख्या कम हो गई। BEST ने 2008 से नए डबल-डेकर को शामिल करना बंद कर दिया है। दैनिक यात्रियों को काम या घर तक ले जाने के अलावा, BEST ने तीन ओपन-डेक डबल-डेकर भी संचालित किए, जो पिछले तीन दशकों से पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थलों की यात्रा बसों के रूप में चलते थे। BEST के प्रवक्ता ने कहा, ये बसें भी 5 अक्तूबर तक सड़कों से हट जाएंगी।
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शहर में अब सिर्फ नई इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें ही चलेंगी। विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनमें से 25 पहले से ही चालू हैं। डीजल से चलने वाली डबल डेकर बसों के सड़कों से हटने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कई यात्री भावुक हो गए। कुछ लोग नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की तुलना में पुरानी बसों को पसंद करते हैं। उनका कहना है कि नई बसों में अन्य चीजों के अलावा आकर्षण की कमी है। एक उत्साही हर्षद जोशी ने कहा, "चूंकि नई डबल-डेकर ई-बसें एयर-कंडीशन वाली हैं, इसलिए हमें पुरानी बसों में आगे बैठने और खुली खिड़कियों से चेहरे पर आने वाली हवा की याद आएगी।"
BEST को इन्हें संरक्षित करने के लिए यात्री समूहों और उत्साही लोगों से कई मांगें मिली हुई हैं। ऐसे ही एक समूह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अपने अंकित डिपो संग्रहालय को इस आइकन को संजोने के लिए कम से कम दो यूनिट्स को प्रदर्शित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव भेजा है।
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बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) द्वारा संचालित लाल डबल-डेकर बसें शहर की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की कुंजी रही हैं, क्योंकि इसकी शुरुआत भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने से पहले ही हुई थी। 1937 से, डबल डेकर बसें न सिर्फ कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा रही हैं, बल्कि शहर की पहचान और लाखों लोगों की बचपन की अभिन्न यादों का हिस्सा भी बन गई हैं।
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मुंबई में लगभग 900 ऐसी डीजल से चलने वाली डबल-डेकर बसें थीं जो शहर में अपने दौर में चलती थीं। बाद में परिचालन की ज्यादा लागत सहित कई वजहों से इन बसों की संख्या कम हो गई। BEST ने 2008 से नए डबल-डेकर को शामिल करना बंद कर दिया है। दैनिक यात्रियों को काम या घर तक ले जाने के अलावा, BEST ने तीन ओपन-डेक डबल-डेकर भी संचालित किए, जो पिछले तीन दशकों से पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थलों की यात्रा बसों के रूप में चलते थे। BEST के प्रवक्ता ने कहा, ये बसें भी 5 अक्तूबर तक सड़कों से हट जाएंगी।
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शहर में अब सिर्फ नई इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें ही चलेंगी। विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनमें से 25 पहले से ही चालू हैं। डीजल से चलने वाली डबल डेकर बसों के सड़कों से हटने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कई यात्री भावुक हो गए। कुछ लोग नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की तुलना में पुरानी बसों को पसंद करते हैं। उनका कहना है कि नई बसों में अन्य चीजों के अलावा आकर्षण की कमी है। एक उत्साही हर्षद जोशी ने कहा, "चूंकि नई डबल-डेकर ई-बसें एयर-कंडीशन वाली हैं, इसलिए हमें पुरानी बसों में आगे बैठने और खुली खिड़कियों से चेहरे पर आने वाली हवा की याद आएगी।"
BEST को इन्हें संरक्षित करने के लिए यात्री समूहों और उत्साही लोगों से कई मांगें मिली हुई हैं। ऐसे ही एक समूह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अपने अंकित डिपो संग्रहालय को इस आइकन को संजोने के लिए कम से कम दो यूनिट्स को प्रदर्शित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव भेजा है।