फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Death of driver due to rash driving dependents cannot get compensation amount

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! सड़क पर खुद की गलती से हुआ नुकसान, तो अब नहीं मिलेगा मुआवजा

Fri, 04 Jul 2025 12:14 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Fri, 04 Jul 2025 12:14 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत उसकी खुद की लापरवाही या तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने की वजह से होती है, तो उसके परिवार को मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा देने के लिए बीमा कंपनी बाध्य नहीं होगी।

विज्ञापन
Death of driver due to rash driving dependents cannot get compensation amount
कार एक्सीडेंट - फोटो : AI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 2 जुलाई को एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति की मौत उसकी खुद की लापरवाही या तेज रफ्तार में ड्राइविंग के कारण होती है, तो उसके परिजनों को मोटर वाहन अधिनियम के तहत बीमा कंपनी मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं होगी। यह फैसला एक ऐसे मामले में आया, जिसमें एक व्यक्ति की रैश ड्राइविंग के कारण हादसे में मौत हो गई थी और उसके परिजनों ने 80 लाख रुपये के मुआवजे का दावा किया था।
विज्ञापन


क्या था मामला?
यह केस 18 जून 2014 को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जब एक व्यक्ति अपनी Fiat Linea कार चला रहा था। कार में उसके साथ उसके पिता, बहन और भतीजी भी सवार थे। हादसे में उसकी मौत हो गई। परिजनों का दावा था कि टायर फटने से गाड़ी पलट गई, लेकिन पुलिस जांच और चार्जशीट में सामने आया कि हादसा उसकी लापरवाही और तेज रफ्तार में ड्राइविंग की वजह से हुआ।
विज्ञापन


80 लाख रुपये का दावा ठुकराया
मृतक की पत्नी, बेटा और माता-पिता ने बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के खिलाफ 80 लाख रुपये के मुआवजे का दावा किया था। उन्होंने दावा किया कि मृतक की मासिक आमदनी 3 लाख रुपये थी और वह परिवार का एकलौता कमाऊ सदस्य था।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने यह दावा खारिज कर दिया। अधिकरण ने कहा कि मृतक एक "सेल्फ टॉर्टफीजर" (Self-Tortfeasor) था यानी वह खुद अपनी मौत का जिम्मेदार था, इसलिए उसे ‘पीड़ित’ नहीं माना जा सकता।

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने दी मंजूरी
कर्नाटक हाई कोर्ट ने अधिकरण के फैसले को सही ठहराया और सुप्रीम कोर्ट के 2009 के ‘निंगम्मा बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी’ केस का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि यदि दुर्घटना मृतक की अपनी गलती से हुई हो, तो मुआवजा नहीं दिया जा सकता।


अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम का मकसद निर्दोष पीड़ितों की मदद करना है, न कि उन लोगों के परिवारों को मुआवजा देना जो खुद अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed