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सुपरसोनिक कार की ड्राइविंग सीट पर भारतीय मूल की महिला
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 28 Aug 2013 08:16 AM IST
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दुनिया को तकनीकी ताकत देने में भारतीय इंजीनियर का योगदान कम नहीं है। इस बात की जिंदा मिसाल भारतीय मूल की मेकेनिकल इंजीनियर बेवर्ली सिंह हैं।
दुनिया को अब जल्द ही सबसे तेज रफ्तार कार मिलने वाली है। इसे बनाने में भारतीय मूल की एक युवती भी मदद करेगी।
दक्षिण अफ्रीका की 29 वर्षीय मेकेनिकल इंजीनियर बेवर्ली सिंह इस सिलसिले में ब्रिटेन रवाना होने वाली हैं। वह वहां ब्रिस्टल के पास एक हाईटेक सेंटर में ब्लडहाउंड सुपरसोनिक कार बनाने वाली टीम में शामिल होंगी।
रॉकेट-संचालित इस कार को परीक्षण के लिए वर्ष 2015 में दक्षिण अफ्रीका लाया जाएगा। ‘टाइम्स लाइव’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंह ने यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट ऑफ इंग्लैंड से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के लिए ब्लडहाउंड शेवेनिंग स्कॉलरशिप जीती है।
बेवर्ली सिंह इस सुपरफस्ट कार परियोजना के तहत अगले महीने टीम में शामिल होंगी। वह बोइंग और रोल्स रॉयस जैसे कंपनियों के इंजीनियरों के साथ काम करेंगी। उन्होंने इससे पहले भी जनरल मोटर्स जैसी नामचीन ऑटो कंपनी में भी काम किया है।
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बेवर्ली सिंह इसको लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि ब्लडहाउंड पर काम कर रहे इंजीनियर अपने-अपने क्षेत्र में सबसे काबिल हैं। सिंह ने इस काम के लिए अपनी नौकरी भी छोड़ दी है। उनके लिए यह जीवन में एक बार मिलने वाला मौका है।
रॉकेट शक्ति से लैस दुनिया की सबसे तेज कार 2016 तक बनकर तैयार हो सकती है, जिसकी रफ्तार 1,600 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। इसकी रफ्तार मौजूदा समय की सबसे तेज रफ्तार कार से 400 किलोमीटर प्रति घंटा अधिक होगी।
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दुनिया को अब जल्द ही सबसे तेज रफ्तार कार मिलने वाली है। इसे बनाने में भारतीय मूल की एक युवती भी मदद करेगी।
दक्षिण अफ्रीका की 29 वर्षीय मेकेनिकल इंजीनियर बेवर्ली सिंह इस सिलसिले में ब्रिटेन रवाना होने वाली हैं। वह वहां ब्रिस्टल के पास एक हाईटेक सेंटर में ब्लडहाउंड सुपरसोनिक कार बनाने वाली टीम में शामिल होंगी।
रॉकेट-संचालित इस कार को परीक्षण के लिए वर्ष 2015 में दक्षिण अफ्रीका लाया जाएगा। ‘टाइम्स लाइव’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंह ने यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट ऑफ इंग्लैंड से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के लिए ब्लडहाउंड शेवेनिंग स्कॉलरशिप जीती है।
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बेवर्ली सिंह इस सुपरफस्ट कार परियोजना के तहत अगले महीने टीम में शामिल होंगी। वह बोइंग और रोल्स रॉयस जैसे कंपनियों के इंजीनियरों के साथ काम करेंगी। उन्होंने इससे पहले भी जनरल मोटर्स जैसी नामचीन ऑटो कंपनी में भी काम किया है।
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बेवर्ली सिंह इसको लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि ब्लडहाउंड पर काम कर रहे इंजीनियर अपने-अपने क्षेत्र में सबसे काबिल हैं। सिंह ने इस काम के लिए अपनी नौकरी भी छोड़ दी है। उनके लिए यह जीवन में एक बार मिलने वाला मौका है।
रॉकेट शक्ति से लैस दुनिया की सबसे तेज कार 2016 तक बनकर तैयार हो सकती है, जिसकी रफ्तार 1,600 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। इसकी रफ्तार मौजूदा समय की सबसे तेज रफ्तार कार से 400 किलोमीटर प्रति घंटा अधिक होगी।