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यात्रियों की सुरक्षा और बस मानक, मची हुई है खींचतान

Sun, 20 Apr 2014 07:53 AM IST
Updated Sun, 20 Apr 2014 07:53 AM IST
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Bus specifications of standard size urban bus

जवाहरलाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत देश के 121 शहरों में चलने वाली लो-फ्लोर बसों को लेकर शहरी विकास मंत्रालय और बस निर्माता कंपनियों में खींचतान तेज हो गई है।

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कुल 10,506 बसों की खरीद के लिए शहरी विकास मंत्रालय ने अरबन बसों के नए मानक जारी किए हैं, लेकिन बस निर्माता इन मानकों से कई तरह की छूट लेकर अपनी मर्जी की बसें बेचना चाहते हैं। कंपनियों के इस रवैये को देखते हुए शहरी विकास मंत्रालय अरबन बसों के नए मानकों को सड़क परिवहन मंत्रालय से अधिसूचित कराने में जुट गया है।
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शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि बस मानकों को लेकर कंपनियों के अड़ियल रुख की वजह से मंजूर हुई बसों की खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है।
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शहरी विकास मंत्रालय ने सड़क परिवहन मंत्रालय को लिखा पत्र

Bus specifications of standard size urban bus

बस निर्माता नए अरबन बस स्पेसिफिकेशन के अनुसार बसों की आपूर्ति करने के बजाय मानकों में कई तरह की छूट का दबाव बना रहे हैं। अशोक लैलेंड और टाटा मोटर्स ने शहरी विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर बस मानकों में छूट दिए जाने की मांग कर चुके हैं, जिसे मंत्रालय ने सिरे से नकार दिया था।

शहरी विकास मंत्रालय द्वारा बनाए गए अरबन बसों के मानक फिलहाल जेएनएनयूआरएम के तहत होने वाली बसों की खरीद पर ही लागू होते हैं। इन्हें कानूनी वैधता दिलाने के लिए शहरी विकास मंत्रालय ने सड़क परिवहन मंत्रालय को पत्र लिखकर मानकों की अधिसूचना जारी करने की मांग की है।

गौरतलब है कि बस मानकों का मामला शहरी विकास, सड़क परिवहन और भारी उद्योग मंत्रालय के बीच झूलता रहा है। यही वजह है कि शहरों में नियम-कायदों को दरकिनार कर तमाम डग्गामार बसें सिटी बसों के तौर पर चल रही हैं।

4 साल में लागू नहीं हुआ बस बॉडी कोड

Bus specifications of standard size urban bus

एक तरफ जहां बड़े पैमाने पर लो फ्लोर बसों की खराबी का मामला सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है, वहीं बस निर्माता कंपनियां एक बार फिर अपनी शर्तों पर बसों की आपूर्ति करने में जुट गई हैं। ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ एसपी सिंह का कहना है कि पिछले चार साल से बस बॉडी कोड बना हुआ है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया।

अरबन बसों के मानकों को लेकर भी शहरी विकास और सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच तालमेल की कमी रही है। अकेले दिल्ली में 3,375 लो फ्लोर बसें हैं, जिनमें से रोजाना करीब 350-400 बसें खराब रहती हैं। यात्रियों की सुरक्षा और बस मानकों के मामले में सरकार के साथ-साथ बस निर्माता कंपनियों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई है।

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