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Automobile Sector Budget 2024: ऑटो उद्योग के लिए कैसा रहा बजट? ईवी के सस्ते होने के आसार

Tue, 23 Jul 2024 01:51 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 23 Jul 2024 01:51 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीताराम मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 का आम बजट पेश किया। भारत का वाहन उद्योग एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। ऐसे में ऑटो उद्योग के लिए कैसा रहा इस बार का केंद्रीय बजट 2024? जानें डिटेल्स।

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Budget 2024 India How is budget 2024 for automotive sector Automobile Sector News
Electric Vehicle Charger Plug with Digital Display - फोटो : Freepik

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीताराम मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 का आम बजट पेश किया। भारत का वाहन उद्योग एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कई तरह के व्यवधानकारी कारक उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक शीर्ष विनिर्माण (मैन्युफेक्चरिंग) उद्योग होने के नाते, केंद्रीय बजट हमेशा वाहन क्षेत्र से बहुत ज्यादा ध्यान आकर्षित करता है। 
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सस्ता होगा लिथियम
वित्त मंत्री ने लिथियम पर सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने का प्रस्ताव दिया है। लिथियम इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग सहित कई क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख कंपोनेंट है। साथ ही तांबा, कोबाल्ट और दुर्लभ अर्थ एलिमेंट्स (पृथ्वी तत्वों) पर भी छूट का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने इनमें से दो सामग्रियों पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को कम करने का सुझाव दिया है।
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सस्ती हो सकती हैं ईवी
वित्त मंत्री के इस एलान से ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि भविष्य में भारत में इलेक्ट्रिक कारें सस्ती हो सकती हैं। ऐसा मानने के पीछे वजह यह है कि किसी भी इलेक्ट्रिक कार में सबसे ज्यादा महंगा उसका बैटरी पैक होता है। ऐसे में बैटरी सस्ती होगी तो इससे कार की कीमत में भी कटौती होगी। 

लिथियम के सस्ता होना का असर बैटरी के निर्माण लागत पर पड़ेगा। जिससे लिथियम आयन बैटरी सस्ती होगी। कार की बैटरी सस्ती होने पर वाहन निर्माता इलेक्ट्रिक वाहन की कीमतें कम कर सकते हैं। इस समय, इलेक्ट्रिक कार खरीदने की एकमुश्त लागत (अपफ्रंट कॉस्ट) बहुत ज्यादा है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आड़े आने वाले कई कारणों में ईवी की ज्यादा कीमत भी एक बड़ी वजह है। भारतीय सरकार इस दशक के आखिर तक देश की कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की 30 प्रतिशत पैठ का लक्ष्य लेकर चल रही है।
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पैदा होंगी नई नौकरियां
वित्त मंत्री ने मैन्युफेक्टरिंग सेक्टर (विनिर्माण क्षेत्र) में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना का एलान किया। जिसे पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों के रोजगार से जोड़ा जाएगा। यह योजना रोजगार के पहले चार वर्षों के दौरान ईपीएफओ अंशदान के संबंध में कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन प्रदान करेगी। 

इसका मकसद 30 लाख युवाओं को लाभ पहुंचाना और सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार को कवर करना है। सरकार प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के लिए ईपीएफओ अंशदान के लिए नियोक्ताओं को दो साल तक 3,000 रुपये प्रति माह तक की प्रतिपूर्ति (रिइंबर्समेंट) करेगी। इस पहल का मकसद 50 लाख अतिरिक्त लोगों को रोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है।

दोपहिया वाहन उद्योग को होगा फायदा
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर रजत महाजन ने कहा, "सरकार विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित कर रही है। जिसका असर 30 लाख युवाओं पर पड़ने की संभावना है। हमें उम्मीद है कि हाथ में खर्च करने लायक आय वाले ये अतिरिक्त कुशल कर्मचारी दोपहिया वाहन सेगमेंट में ऑटोमोटिव उद्योग में बढ़ोतरी को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।"

मजबूत होगा रोड इंफ्रास्ट्रक्चर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सड़क संपर्क परियोजनाओं के लिए 26,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। इससे देश में पहले से ही मजबूत हो रहा रोड इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा। 

वित्त मंत्री ने पटना-पूर्णिया, बक्सर-भागलपुर, बोधगया-दरभंगा-वैशाली के लिए नई सड़क संपर्क परियोजनाएं शुरू करने का एलान किया।

मशीनरी और उपकरण खरीदना होगा आसान
वित्त मंत्री ने बजट में एलान किया कि एमएसएमई को मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए बिना किसी गारंटी और जमानत के टर्म लोन की सुविधा देने के लिए एक नई योजना शुरू की जाएगी। यह गारंटी फंड 100 करोड़ रुपये तक की गारंटी प्रदान करेगा।

क्या उम्मीदें नहीं हुईं पूरी
केंद्रीय बजट 2024 से अपेक्षित एक प्रमुख घोषणा फेम 3 था। फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक वाहिकल्स (फेम) योजना के पहले और दूसरे चरणों को सफलता से लागू करने के बाद, वाहन उद्योग कार्यक्रम के तीसरे चरण की मांग कर रहा है। जो भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को और मजबूत करेगा। हालांकि इसका आम बजट 2024 में कोई जिक्र नहीं था। 

इसके अलावा भारतीय वाहन उद्योग में सबसे चर्चा का विषय हाइब्रिड वाहनों के लिए टैक्स रियायतें रहा है। पिछले कुछ महीनों में, टोयोटा जैसी भारत की कुछ वाहन निर्माता कंपनियां हाइब्रिड वाहनों के लिए टैक्स बेनिफिट्स की वकालत कर रही हैं। लेकिन सरकार ने इस दिशा में भी कोई एलान नहीं किया। 
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