{"_id":"6ad71dd4ff5d0289a9032835","slug":"beyond-petrol-diesel-how-indian-automakers-adopting-multi-powertrain-strategies-amid-changing-buyer-trends-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेट्रोल-डीजल के दिनों को अलविदा कह रहे भारतीय ग्राहक!: CNG, हाइब्रिड और EV के नए विकल्पों से क्या बदला?","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
पेट्रोल-डीजल के दिनों को अलविदा कह रहे भारतीय ग्राहक!: CNG, हाइब्रिड और EV के नए विकल्पों से क्या बदला?
Tue, 20 Oct 2026 01:22 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:22 PM IST
सार
भारत में कार खरीदने वालों की पसंद तेजी से बदल रही है। बढ़ती ईंधन कीमतों और सख्त होते उत्सर्जन नियमों के बीच वाहन निर्माता कंपनियां अब केवल पेट्रोल और डीजल इंजन तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। जानें कैसे बदल रही है ग्राहकों की जरूरतें।
विज्ञापन
Multi-Powertrain Strategies
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बढ़ते ईंधन के दाम और सख्त होते उत्सर्जन नियमों के बीच भारतीय कार बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वाहन निर्माता कंपनियां अब केवल पारंपरिक पेट्रोल और डीजल तक सीमित रहने के बजाय विभिन्न तरह के पावरट्रेन विकल्प बाजार में उतार रही हैं। ताकि ग्राहकों को रनिंग कॉस्ट संभालने में मदद मिल सके और क्षेत्रीय मांग को पूरा किया जा सके।
विज्ञापन
- FADA के आंकड़े क्या कहते हैं? फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने कुल कार बिक्री में पेट्रोल से चलने वाली कारों की हिस्सेदारी घटकर 41 प्रतिशत रह गई, जो सितंबर 2025 में 47 प्रतिशत थी। वहीं दूसरी ओर, CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
विज्ञापन
रेनो और स्टेलांटिस जैसी यूरोपीय कंपनियां अपनी रणनीति में क्या बदलाव कर रही हैं?
फॉक्सवैगन, रेनो और स्टेलांटिस जैसे यूरोपीय कार निर्माता अब भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ईवी और सीएनजी विकल्पों पर जोर दे रहे हैं:- रेनो (Renault India): रेनो ग्रुप इंडिया के सीईओ स्टेफन डेबलेस का कहना है कि बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केवल नई कारें लॉन्च करना काफी नहीं है। बल्कि सही इंजन विकल्प देना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने माना कि सीमित इंजन विकल्पों के कारण पुरानी डस्टर की बिक्री प्रभावित हुई थी। रेनो अब आने वाले वर्षों में अपनी बाजार हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
- क्षेत्रीय प्राथमिकताएं: मुंबई जैसे शहरों में अकेले सीएनजी की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। स्टेफन के मुताबिक, अगर आपके पास सीएनजी विकल्प नहीं है, तो आप बाजार के एक बड़े हिस्से से चूक जाते हैं। आज के समय में केवल एक या दो इंजन प्रकारों के साथ सफलता हासिल करना मुमकिन नहीं है।
- स्टेलांटिस (Stellantis India): स्टेलांटिस इंडिया के सीईओ शैलेश हजेला ने बताया कि कंपनी अपने ग्लोबल पोर्टफोलियो का इस्तेमाल करते हुए A से D सेगमेंट और मिनीवैन में ICE (पेट्रोल-डीजल), हाइब्रिड और बैटरी ईवी विकल्प पेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी अपनी पहली नई पेशकश 2027 की दूसरी तिमाही में लाएगी।
विज्ञापन
टोयोटा और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियां मल्टी-पावरट्रेन पर क्यों जोर दे रही हैं?
- टोयोटा की मल्टी-पाथवे रणनीति: टोयोटा किर्लोस्कर के कार्यकारी सबरी मनोहर का कहना है कि भारत एक समान बाजार नहीं है। बल्कि यहां अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं। यही वजह है कि टोयोटा हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और सीएनजी (ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ) जैसे विकल्पों पर काम कर रही है। कंपनी अब तक भारत में 3 लाख से ज्यादा हाइब्रिड वाहन बेच चुकी है।
- महिंद्रा और अन्य ब्रांड: महिंद्रा एंड महिंद्रा ने हाल ही में XUV 3XO ZNG के साथ फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी बाजार में एंट्री की है। इसके अलावा, स्कोडा के नेतृत्व वाला फॉक्सवैगन ग्रुप भी भारत में सीएनजी और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
Tata Motors और Maruti Suzuki की रणनीति कितनी पहले शुरू हुई थी?
टाटा मोटर्स (Tata Motors) और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) उन शुरुआती कंपनियों में शामिल रही हैं, जिन्होंने भारतीय बाजार में कई तरह के पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए।
अब अन्य वाहन निर्माता भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। कंपनियों की रणनीति में क्षेत्रीय मांग, ईंधन की उपलब्धता, चलाने की लागत और उत्सर्जन नियमों का महत्व बढ़ता जा रहा है।