जानिए क्या है टर्बो चार्ज्ड इंजन जिसे लेकर कार कंपनियों में होड़ मची हुई है
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आॅटोमोबाइल जगत में तेजी से हो रहा परिवर्तन आज लोगों की आशा से कहीं ऊपर उठ चुका है। लगातार आधुनिक तकनीक लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं फिर बात चाहे किसी भी चीज की हो। लोगों को कुछ नया और बेहतर करने का जुनून है। इस बात का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि पहले जहां कंपनियां वाहनों में सामान्य इंजन का प्रयोग किया करती थी। वहीं अब इसकी जगह टर्बो चार्ज्ड इंजन का प्रयोग किया जा रहा है।
भारत में ही नहीं दुनिया भर में इस इंजन की लोकप्रियता बढ़ रही है। जिसके कई कारण है आज सभी कंपनियां अपनी कारों को बेहतर परफार्मेंस देने के चक्कर में तकनीकी के बारे में सोचने पर मजबूर है। और उसी सोच का नाम है टर्बो चार्ज्ड इंजन ।
इस इंजन को पहले एक या दो कारों में ही इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन समय के साथ-साथ आज हर वाहन निर्माता कंपनी इस टर्बो चार्ज्ड इंजन का प्रयोग कर रही है। आॅटोमोबाइल सेक्टर में आपकी जानकारी हो या ना हो लेकिन आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है। कि एक सामान्य इंजन और टर्बो चार्ज्ड इंजन में अंतर होता है। क्योंकि आज नहीं तो कल आपको कार तो खरीदनी ही है। तो आइए आपको बताते हैं। क्या है टर्बो चार्ज्ड इंजन
कार के सामान्य इंजन और टर्बो चार्ज्ड इंजन दोनों को ही चलाने के लिए स्पार्क, फ्यूल और हवा की मुख्य भूमिका होती है। इन्हीं तीन चीजों से यह दोनो इंजन चलते हैं टर्बो चार्ज्ड इंजन में कोई देखा जाए तो कुछ नया नहीं है। लेकिन हॉ इस इंजन में वो तकनीक प्रयोग की जाती है। जो इसे बिना वजन बढ़ाये ही उसके आउट पुट पॉवर को बढ़ा देती है।
विस्तार से कहें तो टर्बो चार्ज्ड इंजन में प्रयोग की जाने वाली तकनीक की मदद से इंजन के भीतर हवा के दबाव को बढ़ा दिया जाता है। दबाव को बढ़ाने से फ्यूल के लिए और भी ज्यादा जगह खाली हो जाती है। जिसका फर्क इंजन की उर्जा पर पड़ता है। जिससे इंजन का परफार्मेस बढ़ जाती है। और यह ज्यादा आउटपुट प्रदान करने लगता है।
इसके अलावा यदि सामान्य इंजन की बात की जाए तो इसमें हवा का दबाव पूरी तरह से वायुमंडलीय दबाव पर निर्भर करता है। जिसका सीधा असर कार की परर्फोमेंस पर पड़ता है। यही कारण है कि एक सामान्य इंजन टर्बो चार्ज्ड इंजन से कम पॉवर जेनरेट करता है।
अब आप यह तो समझ गए है कि कौन-सा इंजन कैसे काम करता है लेकिन क्या आपको पता है कि टर्बो चार्ज्ड इंजन का प्रयोग फ्यूल कंजप्शन को भी बढ़ाता है। वहीं सामान्य इंजन में ऐसा नहीं होता है। हालांकि वाहन कंपनियां इस पर काम कर रही हैं कि कैसे परफार्मेंस के साथ बेहतर माइलेज का भी ध्यान रखा जाए।