Union Budget 2019: क्या इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आगामी बजट बनाएगा सकारात्मक माहौल?
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ऑटो इंडस्ट्री आगामी केंद्रीय बजट 2019 से काफी उम्मीदें लगाए हैं क्योंकि यह ग्राहकों को वाहनों को खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगा और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित ऑटो उद्योग के लिए सकारात्मक माहौल को बेहतर करेगा। ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री में कार्यरत कंपनियां (फेम) में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और तेजी से अपनाने के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए इंसेटिव योजना के विस्तार की दिशा में काम कर रहे हैं।
यह आगामी केंद्रीय बजट से न्यूनतम 10 वर्षों के विस्तार के साथ सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद भी कर रहा है, इसलिए इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे। इस विस्तार से भारत के इलेक्ट्रिक वाहन को लेकर तय किए गए लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा, जो सुनिश्चित तौर पर इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा। फेम नीति के तहत इंसेटिव योजना में सभी इलेक्ट्रिक वाहन शामिल होने चाहिए और इंसेटिव को केवल लीथियम बैटरी जैसे एडवांस्ड बैटरियों तक सीमित नहीं करना चाहिए।
हम सकारात्मक हैं कि नए बजट में दोपहिया और तीनपहिया वाहनों में लेड एसिड बैटरियों को शामिल किया जाएगा और केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया <250 वॉट्स इंसेंटिव की तरह रजिस्टर्ड वाहनों तक सीमित नहीं है, जिनके रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है।बैटरी सहित सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी के अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्धता के साथ 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
इसके अलावा राष्ट्रीयता वाले बैंकों से ही नहीं, बल्कि एनबीएफसी और प्राइवेट बैंकों के माध्यम से भी एग्रीकल्चर की तरह ही प्रायोरिटी लेंडिंग के तहत रिटेल फाइनेंस की उपलब्धता भी आसानी से होनी चाहिए।आगामी बजट में हम यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि मार्जिन मनी के साथ रिटेल फाइनेंस 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और तीनपहिया सहित सभी कमर्शियल वाहनों पर ब्याज दर को अधिकतम 5% आरओआई रखा जाना चाहिए।