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देश में कार लोन की शर्तें हुईं अब ज्यादा सख्त, ग्राहकों को नहीं मिल रहा है सही लोन

Tue, 24 Sep 2019 11:10 AM IST
Bani Kalra ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Bani Kalra Updated Tue, 24 Sep 2019 11:10 AM IST
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Terms of car loan became stricter loan Disallowance rate increased
car loan - फोटो : Social

नई कार के लिए लोन की राह मुश्किल हो रही है। आमतौर पर यह तीन से चार फीसदी होती थी लेकिन यह बढ़कर करीब 15 से 20 फीसदी तक जा पहुंची। ईटी में छपी खबर के मुताबिक, भारत की शीर्ष ऑटोकंपनियों ने बताया कि कार लोन की हर पांच में से एक एप्लिकेशन रिजेक्ट हो रही है। पहले रिजेक्शन रेट तीन से पांच फीसदी था। बैंकों ने कार लोन की प्रक्रिया लम्बी और पहले से ज्यादा सख्त कर दी है,ऐसे में कंपनियों कि नई गाड़ियों के लोन को लेकर उनकी सतर्कता का अंदाजा साफ लगता है।

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ऑटो सेक्टर मंदी की मार झेल रहा है। गाड़ियों की बिक्री लगातार गिर रही है। ऐसे में पहले से ही कमजोर चल रही गाड़ियों की बिक्री को और भी ज्यादा चोट पहुंच रही है।  कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) जो पहले 15-20 फीसदी कार खरीदारों को कर्ज दे रही थीं अब इस मार्केट से पांच खींच लिए हैं। हालांकि, प्राइवेट बैंकों के मुताबिक फंड की कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उन्होंने लोन देने की शर्तों में भी बदलाव किया है। एनबीएफसी पहले आसान सिबिल क्राइटेरिया का इस्तेमाल करके साल में 25,000 करोड़ से 30,000 करोड़ रुपये तक का लोन देती थी।
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ईटी में छपी खबर के मुताबिक ILFS केस के बाद NBFC की क्रेडिट रेटिंग घटा दी गई है। जिसका इसका असर उनकी बैलेंसशीट पर पड़ा है। एक देश की बड़ी कार कंपनी के मुताबिक नई गाड़ियों के कर्ज का रिजेक्शन रेट 20 फीसदी पहुंच गया है। जिसकी वजह से देश के छोटे शहरों के ग्राहकों की हालात और खराब है। बैंकों ने खरीदारी के लिए पेमेंट मार्जिन भी बढ़ा दिया है। पहले लोन किसी कार की ऑन-रोड कीमत पर मिलता था लेकिन अब इसे एक्स-शोरूम प्राइस तक सीमित कर दिया गया है। जिसकी वजह से नई गाड़ी खरीदने के लिए अब ग्राहकों को ज्यादा नकदी खर्च करनी पड़ रही है। मारुति सुजुकी के मुताबिक कुछ बैंकों ने कर्ज के लिए जरूरी सिबिल स्कोर को बढ़ा दिया है। अब कार लोन मंजूर होने से पहले दिए जाने वाले डाउनपेमेंट का लोन-टू-वैल्यू रेशियो भी बढ़ गया है।
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