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सरकारी वाहन खरीद में स्थानीय निर्मित वाहनों को प्राथमिकता
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 10 Dec 2018 06:34 AM IST
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सरकार ने वाहनों की सरकारी खरीद में कम से कम 65 फीसदी स्थानीय कलपुर्जों से तैयार घरेलू विनिर्मित वाहनों को प्राथमिकता देने को अनिवार्य किया है। यह जानकारी एक सरकारी अधिसूचना से मिली। भारी उद्योग मंत्रालय के नए मानकों के अनुसार यह कदम मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादों के विनिर्माण, उत्पादन व सर्विसेज को भी बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सभी सरकारी इकाइयों को सार्वजनिक खरीद में स्थानीय स्तर पर बने वाहन और उनके कलपुर्जों को प्राथमिकता देनी होगी। मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियम ईंधन की आंतरिक दहन प्रणाली (आईसी) पर आधारित इंजन वाले वाहनों पर लागू होगी, जिसमें दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन, पुर्जों और उनके विनिर्माण व रख रखाव के लिए कलपुर्जे भी शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्मित वाहनों का दर्जा केवल उन्हीं वाहनों को दिया जाएगा जिनके निर्माण में कम से कम 65 फीसदी घरेलू कलपुर्जों का इस्तेमाल किया गया हो। साथ ही वाहन कलपुर्जों को स्थानीय रूप से विनिर्मित उत्पाद का दर्जा तभी मिलेगा, जब उनमें निर्माण में उपयोग होने वाली कम से कम 60 फीसदी वस्तुओं का निर्माण देश में किया गया हो। इस संबंध में नए नियम लागू हो गए हैं, जिनकी समीक्षा 31 मार्च, 2019 के बाद की जायेगी। संशोधित अधिसूचना जारी होने तक यह अधिसूचना वैध रहेगी।
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सभी सरकारी इकाइयों को सार्वजनिक खरीद में स्थानीय स्तर पर बने वाहन और उनके कलपुर्जों को प्राथमिकता देनी होगी। मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियम ईंधन की आंतरिक दहन प्रणाली (आईसी) पर आधारित इंजन वाले वाहनों पर लागू होगी, जिसमें दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन, पुर्जों और उनके विनिर्माण व रख रखाव के लिए कलपुर्जे भी शामिल हैं।
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मंत्रालय ने कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्मित वाहनों का दर्जा केवल उन्हीं वाहनों को दिया जाएगा जिनके निर्माण में कम से कम 65 फीसदी घरेलू कलपुर्जों का इस्तेमाल किया गया हो। साथ ही वाहन कलपुर्जों को स्थानीय रूप से विनिर्मित उत्पाद का दर्जा तभी मिलेगा, जब उनमें निर्माण में उपयोग होने वाली कम से कम 60 फीसदी वस्तुओं का निर्माण देश में किया गया हो। इस संबंध में नए नियम लागू हो गए हैं, जिनकी समीक्षा 31 मार्च, 2019 के बाद की जायेगी। संशोधित अधिसूचना जारी होने तक यह अधिसूचना वैध रहेगी।
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