नियम ताक पर रखकर जाति और पेशे को कार की नंबर प्लेट पर लिखवाना बना नया फैशन
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भारत में देखा जाए तो जातिवाद इस हद तक गहरा चुका है कि इसे खत्म कर पाना नामुमकिन है। दिन पर दिन लोगोंं पर इसका असर इस तरह से हो रहा है कि लोग अपनी जाति का नाम या संगठन लिखवा कर इसका प्रचार तक करने लगे है। अक्सर आपने देखा होगा कि वाहनों की नंबर प्लेट पर आपको वाहन के नंबर की जगह कोई स्लोगन, जाति का नाम, लिखा मिल जाएगा।
अधिकतर वाहनों की नंबर प्लेट पर नंबर की जगह या फिर नंबर के साथ ही पदनाम, जाति या संगठन का नाम मिलेगा। और अगर ऐसे वाहनों से कोई दुर्घटना हो जाती है तो यही नंबर प्लेट इनकी पहचान होने से रोक देती है। वहीं शहर की पुलिस कई चेकिंग पॉइंट पर इन वाहनों की सख्ती से कार्रवाई नहीं कर पाती है।
जिसके चलते वाहन चालकों के हौंसले आसमान पर है। मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक नंबर प्लेट पर सिर्फ नंबर होना चाहिए। इसके अलावा अगर कुछ भी लिखा मिलता है तो उसके खिलाफ सख्त कारवाई के निर्देश है,लेकिन ना ही कारवाई हो रही है ना ही नंबर प्लेट हट रही है।
इस एक्ट के मुताबिक डिजाइनर नंबर प्लेट लिखी गाड़ियों पर जुर्माने का प्रावधान भी है, लेकिन कानून सिर्फ कागज तक ही सामित हो चुके हैं। जब खुद कानून के रक्षक अपनी निजी कारों पर अपने पद का गुणगान करते हैं तो आम आदमी को रोकने से पहले खुद ही उनके मुंह बंद हो जाते हैं।
नियमानुसार " कार की नंबर प्लेट पर उत्तर प्रदेश सरकार व केन्द्र सरकार लिखना भी अवैध माना जाता है, और यहां तो वाहनों व नम्बर प्लेट पर प्रधान, विधायक, सांसद या समाज व संगठन अध्यक्ष समेत सब लिखा जा रहा है।
गौरतलब हो, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात ने कुछ समय पहले एक आदेश जारी कर पुलिस के निजी वाहनों पर पुलिस तक लिखने को अपराध बताया था।
अपनी मर्जी से जिस प्रकार लोग नंबर प्लेटों वाली गाड़ियों से यातायात के नियमों को तार तार कर रहे हैं। इससे पुलिस की मंशा पर भी सवाल खड़ा होता है।