नितिन गडकरी ने नीति आयोग के इरादों पर फेरा ‘पानी’, ऑटो सेक्टर को दी बड़ी राहत
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंदी की मार के जूझ रही ऑटो सेक्टर को बड़ी राहत दी है। गड़करी ने कहा है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में उतारने के लिए कोई भी समय सीमा तय नहीं की है। गौरतलब है कि नीति आयोग ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करके इंटरनल कंबशन इंजन वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन उतारने के लिए समयसीमा तय की थी।
कोई डेडलाइन तय नहीं
गडकरी ने कहा कि मंत्रालय की तरफ से इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर ऐसी कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है। ईटी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने को लेकर कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि डीजल से चलने वाले वाहनों को सड़क से हटाने को लेकर समयसीमा थोपने का कोई इरादा नहीं है।
नीति आयोग ने ड्राफ्ट में तय की थी समयसीमा
इस साल जून में सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अगवाई में बनी स्टीयरिंग कमेटी ने जारी रिपोर्ट में कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाए, साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम करने के लिए देश में ही फैक्टरियां लगा कर बैटरियों का निर्माण किया जाए।
2025 तक बंद होने थे दोपहिया वाहन
इस पैनल ने कई श्रेणी के वाहनों को तय समय सीमा में सड़कों से वाहनों को हटाने के लिए व्यापक योजना बनाई जाए। जिसके तहत सभी तिपहिया वाहनों को 2023 और 150सीसी से कम क्षमता वाले दो पहिया वाहनों को 2025 तक सड़कों से हटा कर उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन लाए जाएं।
ऑटो सेक्टर में 19 साल की सबसे बड़ी गिरावट
गडकरी ने इससे पहले कई मौकों पर कहा था कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने को लेकर कोई भी समय सीमा तय करने से पहले वे इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोगों के साथ बातचीत करेंगे। गौरतलब है कि इस साल जुलाई में यात्री वाहनों की बिक्री में 19 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है, जब बिक्री घटकर 18.71 फीसदी तक पहुंच गई है।
10 लाख नौकरियां पर खतरा
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी एक्मा ने अंदेशा जताया है कि अगर मांग में सुधार नहीं आया, तो 10 लाख नौकरियां जा सकती है। वहीं फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि पिछले तीन महीने में दो लाख लागों की छंटनी हो चुकी है।