डीजल कारें बंद कर सकती हैं Maruti और Mahindra! इस प्लान पर कर रहीं काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Maruti Suzuki और Mahindra and Mahindra जल्द ही कारों में डीजल इंजन से तौबा कर सकती हैं। दोनों ही कंपनियां डीजल कारों पर निर्भरता खत्म करने की योजना पर काम कर रही हैं। मारुति ने इस बारे में अपनी पेरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन से बातचीत भी शुरू कर दी है।
सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन से सलाह-मशविरा शुरू
खबरों के मुताबिक देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने डीजल कारों के भविष्य को देखते हुए पेरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन से सलाह-मशविरा करना शुरू कर दिया है। वहीं कंपनी चाहती है कि डीजल की बजाय सीएनजी पर निर्भरता बढ़ाई जाए।
बोलेरो को छोड़ कर सभी कारों में पेट्रोल इंजन
वहीं महिन्द्रा एंड महिन्द्रा की ज्यादातर कारें डीजल इंजन पर बेस्ड हैं। महिन्द्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका के मुताबिक केवल बोलेरो को छोड़ कर सभी कारों में पेट्रोल इंजन का विकल्प मिलेगा। गोयनका कहना है कि वे इस पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या छोटे, एक-सिलेंडर डीजल इंजन पर चलने वाले हल्के वाणिज्यिक वाहनों जैसे उत्पादों को बनाना बंद कर दिया जाए।
बड़ी एसयूवी मॉडल्स में डीजल इंजन की मांग
लेकिन मारुति सुजुकी के विपरीत, भारत की दूसरी सबसे बड़ी एसयूवी निर्माता कंपनी महिन्द्रा एंड महिन्द्रा डीजल इंजन पेश करना जारी रखेगी, इसकी वजह ये कि कंपनी मानती है कि बड़ी एसयूवी मॉडल्स में डीजल इंजन की मांग अभी भी बरकरार है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर कम
वाहन निर्माता कंपनियों का यह कदम अचानक ही नहीं आया है, जिस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर कम हो रहा है, उसके चलते ही कार कंपनियां इस रणनीति पर विचार कर रही हैं। इससे पहले 1 जनवरी 2018 को डीजल की तुलना में पेट्रोल 17.2% महंगा था, लेकिन 13 फरवरी 2019 को अंतर घटकर मात्र 7.1% रह गया।
डीलरों से सीएनजी डिस्पेंसिंग स्टेशंस का लाइसेंस लेने के लिए कहा
इसके अलावा सरकार के नए नियमों के मुताबिक 1 अप्रैल 2020 से देश में बीएस-6 इंजनों की बिक्री होनी है। साथ ही, कारपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी के तहत को अपने उत्सर्जन में कटौती करने की जरूरत होगी और ज्यादा माइलेज देना होगा। वहीं डीजल इंजन इन मापदंडों पर खरे नहीं उतरते हैं। इससे पहले मारुति ने योजना के तहत अपने डीलरों से सीएनजी डिस्पेंसिंग स्टेशंस का लाइसेंस लेने के लिए कहा था। कंपनी की योजना है कि 2022 तक 2 लाख पैसेंजर वाहन हर साल बेचे जाएं।
फिएट ने खड़े किए हाथ
वहीं मारुति को पार्ट्स सप्लाई करने वाले एक सप्लायर का कहना है कि फिएट ने मारुति को पहले ही सूचित कर दिया है कि 31 मार्च 2020 के बाद बीएस-6 नियम लागू होने के बाद वह 1.3 लीटर वाले डीजल इंजन की सप्लाई नहीं कर पाएगी। यह इंजन मारुति के कई मॉडल्स स्विफ्ट, अर्टिगा, बलेनो, एस-क्रॉस और सियाज में दिया जाता है। वहीं मारुति अब अपना 1.5 लीटर का डीजल इंजन ला रही है, जो बीए-6 मानकों के मुताबिक होगा।