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क्रैश टेस्ट में फेल हुई जीप की यह एसयूवी, मिली 1 स्टार रेटिंग
Tue, 28 May 2019 04:06 PM IST
Harendra Chaudhary
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 28 May 2019 04:06 PM IST
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Jeep Wrangler ANCAP test
- फोटो : ANCAP
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जीप की यह कार क्रेश टेस्ट में एक बार फिर फेल हो गई है। 2019 की जीप रैंगलर को इस साल अप्रैल 2019 में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लांच किया गया था। लेकिन ANCAP यानी आस्ट्रेलियन न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम में रेंगलर को 1 स्टार मिला है।
भारत में भी नई जीप रैंगलर को टेस्टिंग के दौरान कई बार स्पॉट किया जा चुका है और भारत में यह पेट्रोल और डीजल में टक्कर दे सकती है। वहीं इसकी कीमत 60 से 70 लाख के बीच रखी जा सकती है।
इससे पहले पिछले साल दिसंबर में यूरो न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम में भी रैंगलर को 1 स्टार मिला था। इस बार क्रेश टेस्ट में डीजल इंजन वाली रैंगलर के फोर डोर वेरियंट का इस्तेमाल किया गया। इसके सेफ्टी फीचर्स की बात करें, तो इसमें फ्रंट और साइड में एयरबैग लगे थे। वहीं पीछे की सीटों पर सिर को सुरक्षा देने के लिए साइड एयरबैग नहीं दिए गए थे।
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रिपोर्ट में सामने आया कि रैंगलर के फुटवेल का स्ट्रक्चर सही नहीं था और डैशबोर्ड के डिजाइन से ड्राइवर और पैसेंजर को चोट लग सकती है। वहीं क्रेश टेस्ट में इस्तेमाल की गई डमी की रीडिंग और रेटिंग के मुताबिक पीछे बैठे पैसेंजर की गर्दन को ‘वीक’ रेटिंग की दी हई है, चेस्ट प्रोटेक्शन को ‘पुअर’ बताया गया है।
चाइल्ड प्रोटेक्शन की बात करें, तो फ्रंटल ऑफसेट टेस्ट में 6 साल के बच्चे की डमी को गुड रेटिंग मिली है। वहीं 10 साल के बच्चे की डमी को वीक और चेस्ट प्रोटेक्शन के लिए केवल पर्याप्त रेटिंग दी गई है।
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भारत में भी नई जीप रैंगलर को टेस्टिंग के दौरान कई बार स्पॉट किया जा चुका है और भारत में यह पेट्रोल और डीजल में टक्कर दे सकती है। वहीं इसकी कीमत 60 से 70 लाख के बीच रखी जा सकती है।
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इससे पहले पिछले साल दिसंबर में यूरो न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम में भी रैंगलर को 1 स्टार मिला था। इस बार क्रेश टेस्ट में डीजल इंजन वाली रैंगलर के फोर डोर वेरियंट का इस्तेमाल किया गया। इसके सेफ्टी फीचर्स की बात करें, तो इसमें फ्रंट और साइड में एयरबैग लगे थे। वहीं पीछे की सीटों पर सिर को सुरक्षा देने के लिए साइड एयरबैग नहीं दिए गए थे।
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रिपोर्ट में सामने आया कि रैंगलर के फुटवेल का स्ट्रक्चर सही नहीं था और डैशबोर्ड के डिजाइन से ड्राइवर और पैसेंजर को चोट लग सकती है। वहीं क्रेश टेस्ट में इस्तेमाल की गई डमी की रीडिंग और रेटिंग के मुताबिक पीछे बैठे पैसेंजर की गर्दन को ‘वीक’ रेटिंग की दी हई है, चेस्ट प्रोटेक्शन को ‘पुअर’ बताया गया है।
चाइल्ड प्रोटेक्शन की बात करें, तो फ्रंटल ऑफसेट टेस्ट में 6 साल के बच्चे की डमी को गुड रेटिंग मिली है। वहीं 10 साल के बच्चे की डमी को वीक और चेस्ट प्रोटेक्शन के लिए केवल पर्याप्त रेटिंग दी गई है।