किसानों को और कर्ज के बोझ तले दबा देगी जीएसटी, जानें कैसे
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पूरे देश में जहां एक ओर किसान कर्ज माफी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं दूसरी ओर उनके ऊपर एक और आफत आने जा रही है। यह नई आफत है जीएसटी की मार। जीएसटी के चलते ट्रैक्टर के इनपुट कास्ट में 25 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी होने जा रही है। इसके चलते अब किसानों को ट्रैक्टर खरीदना महंगा पड़ेगा। हाल ही में 66 आइटम पर जीएसटी के रेट रिलीज किए गए हैं जो कि 18 फीसदी के दायरे में आएंगे। इसके लागू करने में 28 फीसदी की इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और 18 फीसदी का आउटपुट वास्तव में राहत कम दे रहा बल्कि मुसीबत ज्यादा ला रहा है। इसके चलते प्रति ट्रैक्टर को बनाने में कीमत 25 हजार रुपये तक बढ़ जाएगा। जिसके वजह से ट्रैक्टर इंडस्ट्री पर 1600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा। यह जानकारी ट्रैक्टर मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के द्वारा एक रिलीज के जरिए जारी की गई है।
एसोसिएशन के मुताबिक कई कृषि संबंधी उपकरणों पर राहत है लेकिन ट्रैक्टर के अधिकतर पुर्जों जैसे की इंजन ट्रांसमिशन व अन्य उपकरण जीएसटी के 28 फीसदी के दायरे में आते हैं जिसके वजह से ट्रैक्टर की कीमत में बढ़ोत्तरी होनी तय है। एसोसिएशन ने इसके तहत मांग की है कि ट्रैक्टर में प्रयोग होने वाले हर उपकरण को जीसएटी के 18 फीसदी के दायरे में ही रखा जाना चाहिए। क्योंकि सिर्फ एप्लीकेशन को टैक्स के कम स्लैब में रखकर किसानों को मदद नहीं की जा सकती।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए टेफ के चेयरमैन व सीईओ मल्लिका श्रीनिवासन कहती हैं कि,"हमारे वित्त मंत्री के स्टेटमेंट से यह साफ पता चलता है कि वो नहीं चाहते कि जीएसटी को लागू करने में कोई भी प्रभाव किसानों पर पड़े इसलिए इस बात पर विचार करना जरूरी हो जाता है।"
ट्रैक्टर पर पहले कोई ड्यूटी नहीं लगती थी इसे अब 12 फीसदी के दायरे में रखा गया है। वहीं एसोसिएशन की मांग है कि कंपोनेंट ड्यूटी को 28 फीसदी की जगह रखा जाए। ऐसा करने से ट्रैक्टर पर पड़ने जा रहे 25 हजार रुपये के बोझ से बचा जा सकेगा। किसानों की कर्ज माफी आंदोलन के बाद यह बड़ा मुद्दा हो सकता है।