अब आप भी जान सकेंगे आपकी फेवरेट कार कितनी है 'मजूबत', सरकार ने बनाया नियम
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जल्द ही भारत में लोगों को पता चल सकेगा कि उनकी भावी पसंदीदा कार कितनी सुरक्षित है। इस समय देश की सबसे सुरक्षित कार टाटा नेक्सन है, जिसे ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5 स्टार रेटिंग मिली है। लेकिन अभी तक ये क्रैश टेस्ट विदेश में ही होते रहे हैं और भारत के पास अभी तक ऐसी कोई सुविधा नहीं थी, जिससे कार की सेफ्टी रेटिंग के बारे में जानकारी मिल सके। लेकिन सरकार जल्द ही सुविधा देने जा रही है।
केंद्रीय मोटर यान (छठा संशोधन) नियम, 2019
केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 18 जुलाई को एक नोटिफिकेशन जारी करके मध्य प्रदेश के इंदौर में नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स (नैट्रैक्स) को वाहनों का टेस्ट करने के लिये अधिकृत किया है। सरकार ने इन नियमों को केंद्रीय मोटर यान (छठा संशोधन) नियम, 2019 नाम दिया है। मंत्रालय का कहना है कि वाहनों के क्रैश टेस्ट की जांच का अधिकार सरकारी उपक्रम ऑटोमोबाइल टेस्टिंग एंड रिसर्च डेवलेपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (नाट्रिप) के पास होगा और सरकार ने इस संबंध में पहले ही 20 मई 2019 को इस संस्था को मैकेनिकल टेस्टिंग की मान्यता देने के लिये अधिकृत किया था।
गाड़ियां नए सेफ्टी AIS-145 सिस्टम के तहत हो रहीं अपडेट
इससे पहले लगातार खबरें आ रही थीं कि सरकार भारत न्यू व्हीकल सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के नाम से अपने क्रैश टेस्ट को लॉन्च करने की योजना बना रही है। जिसके तहत देश की सभी गाड़ियों को नए सेफ्टी AIS-145 सिस्टम के तहत अपडेट किया जा रहा है। जिनमें एबीएस के साथ ईबीडी, ड्राइवर साइड एयरबैग, रिवर्स पार्किंग सेंसर्स, स्पीड अलर्ट सिस्टम और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसे फीचर शामिल हैं। सभी कार कंपनियों को इन फीचर को लगाना अनिवार्य है।
विदेश में होने वाले टेस्ट्स पर खड़े होते रहे हैं सवाल
सरकार ने 20 मई 2019 को इस संबंध में जनता से सुझाव मांगे थे, जिसकी अंतिम तिथि 21 जून को समाप्त हो गई, जिसके बाद सरकार ने अधिसूचना जारी करके 20 जुलाई से इसे लागू कर दिया। अभी तक जितने भी टेस्ट होते हैं वे सभी विदेश में होते हैं और लगातार उनकी विश्वसनियता पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं। इन टेस्टों में कई बार देश की कई कारें फेल हो जाती हैं, जिससे उनकी साख पर सवाल पैदा होते हैं। वहीं अब भारत में ही ये सुविधा लागू होने से कारों का क्रैश टेस्ट भारत में ही किया जा सकेगा और उसके पश्चात ही वे सड़कों पर उतर पाएंगी।
दो तरफ से मारी जाएगी टक्कर
खबरों के मुताबिक नाट्रिप के सहयोग से ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर चेन्नई व इंदौर में अंतराष्ट्रीय स्तर के टेस्टिंग ट्रैक बनकर तैयार कर लिए गए हैं। क्रैश टेस्ट में दो टेस्ट होते हैं, एक सामने से और दूसरा साइड से। पहले टेस्ट में सामने से 56 किमी की रफ्तार से सामने से टक्कर कराई जाती है, वहीं 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कार को साइड से टक्कर मारी जाती है। इस कार कार के अंदर डमी रखी होगी, जिसमें सेंसर्स लगे होंगे और क्रैश टेस्ट में सेंसर्स के जरिये मापा जाएगा कि टक्कर का इंपैक्ट डमी पर कहां-कहां पर पड़ा। क्रैश टेस्ट में कार के आगे का 40 फीसदी हिस्सा टकराना चाहिए। वहीं दूसरे टेस्ट में टक्कर सीधे ड्राइवर सीट के हिस्से पर मारी जाती है।
इन देशों के पास अपने असेसमेंट प्रोग्राम
2014 में ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम यानी GNCAP की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसमें देश में बनने वाली कारों को जीरो रेटिंग दी गई थी। अमेरिका में 1978 में न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम की शुरुआत हुई थी, क्रैश टेस्ट में मिली रेटिंग की जानकारी ग्राहकों को कार खरीदते वक्त दी जाती थी। इस प्रोग्राम की बढ़ती लोकप्रियता के बाद धीरे-धीरे दुनियाभर के तकरीबन सभी देशों ऑस्ट्रेलियन NCAP, यूरो NCAP, जापान NCAP, एशियन NCAP, चाइना NCAP, कोरियन NCAP और लैटिन NCAP ने अपने-अपने प्रोग्राम लॉन्च कर दिये।