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ई-वाहनों को बढ़ावा देने से बिजली कंपनियों को हो सकती है 11 अरब डॉलर की तगड़ी कमाई

Thu, 14 Jun 2018 05:44 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 14 Jun 2018 05:44 PM IST
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electricity companies can earn upto 11 billion dollar if government pushes electric vehicles

भारत में व्यापक पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-वाहन) को अपनाने से साल 2030 तक बिजली की कुल मांग 69.6 टेरावाट घंटे को छू सकती है, जिससे बिजली कंपनियों को 11 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय अर्जित करने में मदद मिलेगी। बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

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कार्बन उत्सर्जन में होगी कमी
एसोचैम तथा अर्न्स्ट एंड यंग एलएलपी के संयुक्त अध्ययन के मुताबिक, देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता में वृद्धि देश के विद्युत क्षेत्र के आमूल-चूल बदलाव तथा कार्बन उत्सर्जन 40-50 फीसदी तक घटाने की दिशा में सहायक होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन कटौती लक्ष्य को हासिल करने में देश को मदद मिलेगी। 
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रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यापक तौर पर अपनाने से विद्युत व उपयोगिता क्षेत्रों को मांग व आपूर्ति दोनों ही पक्ष से कुल लागत तथा आय संबंधी लाभ हासिल करने में मदद मिल सकती है। 

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कोयले पर निर्भरता होगी कम

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अध्ययन के मुताबिक, एक आक्रामक नवीकरणीय ऊर्जा परिदृश्य के तहत साल 2030 तक आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्बन उत्सर्जन में 40-50 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट में हालांकि यह भी कहा गया है कि अगर कोयले की मदद से ही विद्युत उत्पादन जारी रहा, तो कार्बन उत्सर्जन में 20-30 फीसदी की ही कमी आने की उम्मीद है।अध्ययन में आयातित कोयले पर निर्भरता कम करके, नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा स्वतंत्रता में बढ़ोतरी, प्लांट लोड फैक्टर में कमी तथा राष्ट्रीय ग्रीड एकीकरण के जरिये देश के विद्युत व उपयोगिता क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन पर प्रकाश डाला गया है।

चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर 
रिपोर्ट में एक राष्ट्रीय विनियमित दर का सुझाव दिया गया है, जो देशभर के सभी चार्जिंग स्टेशन पर लागू हो सकता है। साथ ही, सरकार को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मानकीकरण की तत्काल सुविधा तथा उन्नत चार्जिंग प्रौद्योगिकी के लिए प्रोत्साहन मुहैया करानी चाहिए।

सरकार को करना होगा प्रोत्साहित
रिपोर्ट में कहा गया है कि हम सरकार से उम्मीद करते हैं कि नियामकीय चुनौतियों को सरल बनाने के लिए सक्रिय उपाय करेगी और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने को लेकर नीतिगत प्रोत्साहन प्रदान करेगी।

यह भी कहा गया है कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन मिशन घरेलू उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र के विकास व फलने-फूलने पर निर्भर करता है, हालांकि देश में एक इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला की अनुपस्थिति शोध व विकास तथा स्थानीय उत्पादन क्षमताओं में अत्यावश्यक निवेश की मांग करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारी पूंजी निवेश के मद्देनजर, इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट नीति व दिशा-निर्देश आवश्यक है। 

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