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चार साल में ई-कारें चलाना होगा और सस्ता, यूपी के 5 शहरों में मिलेंगी इलेक्ट्रिक कार की सेवा

Wed, 11 Apr 2018 10:45 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Apr 2018 10:45 AM IST
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electric cars will be cheaper in four years from now, five cities will get benefit
सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक कार के क्षेत्र में तेजी से नव प्रवर्तन हो रहा है और अगले चार साल में इलेक्ट्रिक कारों की कीमत पेट्रोल-डीजल से चलने वाली कारों से भी कम हो जाएगी। ई-कार भरोसेमंद है या नहीं, यह जानने के लिए इसे किराये पर लेकर भी चलाया जा सकता है, जिसकी मंगलवार से शुरुआत हो गई है।
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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने यहां किराये पर इलेक्ट्रिक कार देने की सेवा की शुरुआत करते हुए कहा कि ई-व्हीकल में बैटरी की कीमत ही मुख्य है और अब बैटरी की कीमत काफी कम हो रही है।
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इसी प्रवृत्ति को देखते हुए वह कह रहे हैं कि अगले चार वर्ष में पेट्रोल-डीजल की कार के मुकाबले ई-व्हीकल की कीमत कम होगी। उन्होंने कहा कि चाहे किफायत का मामला हो या आराम का, हर मामले में ई-व्हीकल पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कार के बराबर है।
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2017-18 में रिकॉर्ड 33 लाख यात्री वाहन बिके

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वाहन प्रदूषण

देश में यात्री वाहनों की बिक्री वित्त वर्ष 2017-18 में 7.89 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 33 लाख की रिकॉर्ड ऊंचाई पर रही। मांग में यह वृद्धि छोटे शहरों द्वारा मांग बढ़ने तथा यूटिलिटी व्हीकल की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से हुई।

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य अवधि में घरेलू यात्री वाहनों (पीवी) की बिक्री 32,87,965 इकाई रही, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा 30,47,582 इकाई था।

2017-18 में कारों की घरेलू बिक्री 2016-17 में 21,03,847 इकाई के मुकाबले 21,73,950 इकाई रही, जो 3.33 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है।आलोच्य अवधि में यूटिलिटी व्हीकल की बिक्री 20.97 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 9,21,780 इकाई रही, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 7,61,998 इकाई था।

2017-18 में यात्री वाहनों का निर्यात हालांकि 1.51 फीसदी की गिरावट के साथ 7,47,287 इकाई रहा, जो 2016-17 में 7,58,727 इकाई रहा था। वित्त वर्ष 2017-18 में विभिन्न श्रेणियों में वाहनों की बिक्री 14.22 फीसदी की वृद्धि के साथ 2,49,72,788 इकाई रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2,18,63,281 इकाई था।

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने यहां बताया कि यह साल हमारे लिए सकारात्मक रहा। यात्री बसों को छोड़कर वाहनों की हर श्रेणी में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह इस तथ्य पर जोर देता है कि एक कठिन साल के बावजूद ऑटो उद्योग ने अपनी वापसी को दर्शाया। 

उल्लेखनीय है कि पिछले वित्त वर्ष में ऑटोमोबाइल उद्योग को नोटबंदी, बीएस-3 उत्सर्जन मानदंड से बीएस-4 उत्सर्जन मानदंड में स्थानांतरने के प्रतिकूल असर तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के असर का सामना करना पड़ा था। 

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