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ईंधन महंगा होने से डीजल कारों की बिक्री घटी, 22 फीसदी रह गई वाहन बिक्री में हिस्सेदारी

Fri, 18 May 2018 11:56 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 18 May 2018 11:56 AM IST
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diesel cars market share down as price soars to a new height

डीजल कारों पर सरकार की तिरछी नजर का असर अब कार बाजार पर दिखना शुरू हो गया है। कुछ साल पहले कार बिक्री में करीब आधी हिस्सेदारी वाली डीजल कारों की बिक्री अब घटकर 22 फीसदी तक सिमट गई है। हालांकि, स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) में अभी भी डीजल इंजन का ही जलवा है। 

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सोसाइटी ऑफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्यूफेक्चरर्स (सियाम) के उप महानिदेशक सुगातो सेन का कहना है कि किसी भी ईंधन के बारे में सरकार जैसी नीति बनाएगी, बाजार उसी हिसाब से प्रतिक्रिया देगा। इस समय तो सरकार की नीति डीजल ईंधन को बढ़ावा देने के खिलाफ है, तभी तो डीजल की कारों पर जीएसटी का ज्यादा बोझ है। इसके अलावा, दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तो डीजल कारों की उम्र महज 10 वर्ष तय की गई है, जबकि पेट्रोल की कार 15 वर्ष तक चला सकते हैं।
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डीजल कारों की बिक्री अप्रैल में भी गिरी
सेन ने बताया कि इस वर्ष बीते अप्रैल में कारों की बिक्री में डीजल से चलने वाली कारों की हिस्सेदारी घटकर 22 फीसदी रह गई है। साल 2017-18 में डीजल वाहनों की हिस्सेदारी 23 फीसदी थी। अभी कुछ ही साल पहले, वर्ष 2012-13, में डीजल कारों की हिस्सेदारी 47 फीसदी थी।
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उनका कहना है कि पहले डीजल और पेट्रोल की कीमतों में काफी अंतर था, लेकिन अब यह घटकर नौ रुपये से भी कम हो गया है। साथ ही इस पर कर का बोझ और इसका उम्र कम होने से ग्राहक पेट्रोल इंजन वाला वाहन लेना ही बेहतर समझते हैं। 

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2012 के दौरान दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत 71.16 रुपये थी, तो डीजल 40.91 रुपये। मतलब दाम में 30 रुपये से भी ज्यादा का अंतर। अब, 17 मई 2018 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत जहां 75.32 रुपये प्रति लीटर है, तो डीजल की कीमत 66.79 रुपये प्रति लीटर। मतलब नौ रुपये से भी कम का अंतर। 

जीएसटी की दरों में भी है अंतर 

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जीएसटी प्रणाली में पेट्रोल वाहनों पर जहां 29 फीसदी का जीएसटी है, तो डीजल वाहनों पर 31 फीसदी। मझोले आकार के डीजल वाहनों पर तो 43 फीसदी का जीएसटी है, जबकि कुछ एसयूवी पर सेस मिलाकर कुल 52 फीसदी का कर लगता है।  

एसयूवी की बिक्री पर असर नहीं
सियाम के आंकड़ों के मुताबिक, एसयूवी की बिक्री पर डीजल की कीमत बढ़ने का कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। दरअसल, पावर के हिसाब से देखा जाए तो पेट्रोल के मुकाबले डीजल पावरफुल ईंधन है। इसमें ज्यादा शक्ति है, टॉर्क ज्यादा है और सबसे बड़ी बात कि डीजल वाले वाहन में माइलेज भी ज्यादा है। आमतौर पर एसयूवी तो टशन के लिए खरीदी जाती है और जहां टशन की बात आ गई, वहां ईधन की कीमत कोई खास मायने नहीं रखती। 
 
सभी ईधनों से होता है प्रदूषण 
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्रदूषण के नाम पर किसी खास ईंधन को बदनाम करना ठीक नहीं है। डीजल वाले वाहनों में नाइट्रोजन ऑक्साइड ज्यादा निकलता है, तो पेट्रोल वाले वाहनों में कार्बन मोनोक्साइड ज्यादा निकलता है। सीएनजी वाले वाहनों से पर्टिकुलेट मैटर का ज्यादा उर्त्सजन होता है। ई-व्हीकल से उस शहर में भले ही ज्याद प्रदूषण नही हो, लेकिन जहां बिजली घर है, वहां तो प्रदूषण फैलता ही है।

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