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#LadengeCoronaSe: मारुति सुजुकी ने 1000 से ज्यादा वेंटिलेटर्स तैयार किए, जल्द करेगी 10,000 वेंटिलेटर्स की आपूर्ति
Fri, 24 Apr 2020 09:03 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 24 Apr 2020 09:03 PM IST
सार
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में वेंटिलेटर बना रही है। मारुति सुजुकी इंडिया ने देश में वेंटिलेटर उत्पादन बढ़ाने के लिए AgVa हेल्थकेयर के साथ मिलकर काम कर रही है।
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Maruti Suzuki Ventilator
- फोटो : Social Media
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विस्तार
कंपनी ने कहा है कि पहली वेंटिलेटर का निर्माण AgVa हेल्थकेयर के साथ करार होने के 10 दिनों के अंदर 11 अप्रैल को हुआ था। अब कंपनी 1000 से ज्यादा वेंटिलेटर्स तैयार कर चुकी है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि वो HLL कंपनी को उनके ऑर्डर के 10 हजार वेंटिलेटर्स की आपूर्ति कर देंगे।
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देश में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की वजह से वेंटिलेटरों की जरूरत बढ़ गई है। इसके लिए मारुति ने एग्वा हेल्थकेयर साथ एक करार किया है। एग्वा वेंटिलेटर सरकार से मंजूरी प्राप्त वेंटिलेटर निर्माता है।
The first ventilator was made on April 11,within 10 days of Maruti Suzuki India Limited (MISL) joining with Agva. Cumulative production has crossed 1000 units&deliveries to M/s HLL,against their order of 10000 ventilators will now commence:RC Bhargava,Chairman,Maruti Suzuki India https://t.co/qomeIMiBZf
— ANI (@ANI) April 24, 2020
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मारुति का बयान
मारुति सुजुकी इंडिया के अध्यक्ष आरसी भार्गव ने कहा, "मारुति सुजुकी इंडिया ने वेंटिलेटर उत्पादन को बढ़ाने के लिए, एक नए और छोटे स्टार्ट-अप AgVa हेल्थकेयर को सक्षम करने के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्ता निर्माण के लिए अपनी क्षमताओं को उपयोग करने का फैसला किया था।"
मारुति सुजुकी इंडिया के अध्यक्ष आरसी भार्गव ने कहा, "मारुति सुजुकी इंडिया ने वेंटिलेटर उत्पादन को बढ़ाने के लिए, एक नए और छोटे स्टार्ट-अप AgVa हेल्थकेयर को सक्षम करने के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्ता निर्माण के लिए अपनी क्षमताओं को उपयोग करने का फैसला किया था।"
वेंटिलेटर्स की कमी
कोरोना वायरस दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 1752 नए मामले सामने आए हैं और 37 लोगों की मौत हो गई है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए वैज्ञानिक और कई शोधकर्ता लगातार कोशिशों में जुटे हैं। इस बीच कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ितों के इलाज के लिए वेंटिलेटर्स की खासी कमी महसूस की जा रही है।
कोरोना वायरस दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 1752 नए मामले सामने आए हैं और 37 लोगों की मौत हो गई है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए वैज्ञानिक और कई शोधकर्ता लगातार कोशिशों में जुटे हैं। इस बीच कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ितों के इलाज के लिए वेंटिलेटर्स की खासी कमी महसूस की जा रही है।
सरकार ने दिया था आदेश
लचर स्वास्थ्य सेवाओं से परेशान देश में पहले से ही वेंटिलेटर्स का आकाल है, वहीं कोरोना ने इसे और बढ़ा दिया है। मजबूरन सरकार को ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर बनाने का आदेश देना पड़ा।
लचर स्वास्थ्य सेवाओं से परेशान देश में पहले से ही वेंटिलेटर्स का आकाल है, वहीं कोरोना ने इसे और बढ़ा दिया है। मजबूरन सरकार को ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर बनाने का आदेश देना पड़ा।
ये है प्रमुख वजह
ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर के ऑर्डर देने के पीछे कुछ खास वजहें हैं। असल में ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग विशेषज्ञता है। इन कंपनियों के पास बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट का अलग भारी-भरकम विभाग होता है। फोर्ड मोटर्स, मारुति सुजुकी आदि कंपनियां हर साल लाखों वाहनों का निर्माण करती हैं। इसलिए उनके पास विशाल टीमें होती हैं। साथ ही जगह की भी कमी नहीं होती है। उनके पास अनुभवी कर्मचारी होते हैं। इन कंपनियों के पास पैसे की भी कोई कमी नहीं होती है। इसलिए यह भारी निवेश कर सकती हैं। जबकि अन्य कंपनियों के लिए ऐसा करना मुश्किल है।
ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर के ऑर्डर देने के पीछे कुछ खास वजहें हैं। असल में ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजीनियरिंग विशेषज्ञता है। इन कंपनियों के पास बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट का अलग भारी-भरकम विभाग होता है। फोर्ड मोटर्स, मारुति सुजुकी आदि कंपनियां हर साल लाखों वाहनों का निर्माण करती हैं। इसलिए उनके पास विशाल टीमें होती हैं। साथ ही जगह की भी कमी नहीं होती है। उनके पास अनुभवी कर्मचारी होते हैं। इन कंपनियों के पास पैसे की भी कोई कमी नहीं होती है। इसलिए यह भारी निवेश कर सकती हैं। जबकि अन्य कंपनियों के लिए ऐसा करना मुश्किल है।
वेंडर्स का बड़ा नेटवर्क
यह कंपनियां आसानी से सरकार की मदद करने की स्थिति में होती हैं। यह अपने वर्करो से तुरंत माल तैयार कर सप्लाई कर सकती हैं। इसके अलावा इन कंपनियों के पास कंपोनेंट्स बनाने के लिए वेंडर्स का विशाल नेटवर्क होता है। ये लोग लाइट से लेकर इंजन का सामान बनाते हैं और इंजीनियरिंग में इनकी दक्षता होती है। इसलिए इन्हें वेटिंलेटर जैसे उपकरणों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी आसानी से उपलब्ध होता है।
यह कंपनियां आसानी से सरकार की मदद करने की स्थिति में होती हैं। यह अपने वर्करो से तुरंत माल तैयार कर सप्लाई कर सकती हैं। इसके अलावा इन कंपनियों के पास कंपोनेंट्स बनाने के लिए वेंडर्स का विशाल नेटवर्क होता है। ये लोग लाइट से लेकर इंजन का सामान बनाते हैं और इंजीनियरिंग में इनकी दक्षता होती है। इसलिए इन्हें वेटिंलेटर जैसे उपकरणों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी आसानी से उपलब्ध होता है।