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बजट 2019: इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलेगी छूट, पूरे देश में बनेगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

Fri, 05 Jul 2019 12:22 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Jul 2019 12:22 PM IST
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Budget 2019: government will develop charging infrastructure for electric vehicles in india
रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI

मोदी सरकार आने वाले समय में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी चार्ज करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर काम करेगी। बजट 2019 में इसके लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। सरकार की कोशिश है कि इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए की चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए। शुक्रवार को संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी चार्जिंग के लिये इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का एलान किया। इससे पहले गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी देने की बजाय बैटरी को फास्ट चार्जिंग सर्विसेज उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया था।

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इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी मात्र 0.06 प्रतिशत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि देश में फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी मात्र 0.06 प्रतिशत है, वहीं चीन में यह दो प्रतिशत और नार्वे में यह 39 प्रतिशत है। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि आने वाले वक्त में भारत के शहर इलेक्ट्रिक वाहनों का डेट्रॉइट शहर बन सकते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता में सबसे बड़ी बाधा चार्जिंग है और वाहनों को पूरी तरह चार्ज करने में बहुत समय लगता है। यहां तक कि फिलहाल मौजूद फास्ट चार्जर भी एक इलेक्ट्रिक कार को पूरी चरह से चार्ज करने में कम से कम डेढ़ घंटा, जबकि धीमे चार्जर से चार्ज करने में कम के कम 8 घंटे लग जाते हैं।

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यूनिवर्सल चार्जर्स की जरूरत

रिपोर्ट के मुताबिक इस सबसे के अलावा देश में एक बड़ी समस्या यूनिवर्सल चार्जर्स की है। देश में यूनिवर्सल चार्जर्स स्टैंडर्ड्स नहीं हैं और ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने से निवेश में बढ़ोतरी होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी हिस्सेदारी की एक वजह भारतीय सड़कों पर संसाधनों की कमी है।      

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इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने पर इंसेंटिव देने की योजना

हालांकि कुछ दिन पहले खबरें आई थीं कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को लेकर इंसेंटिव देने की योजना पर काम कर रही है। एनटीपीसी को जल्द ही चार्जिंग स्टेशंस के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का दिया जा सकता है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का दिल उसकी बैटरी होती है, और भारत में अधिक तापमान परिस्थितियों में अच्छी तरह काम कर सकने वाली उचित बैटरी टेक्नोलॉजी को डेवलेप करने की जरूरत है।

CO2 में 846 मिलियन टन की कमी

आर्थिक सर्वे में नीति आयोग के रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगर 2030 तक प्राइवेट कारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत, कमर्शियल कारों में 70 प्रतिशत, बसों में 40 प्रतिशत दो-पहिया और तिपहिया वाहनों में 80 प्रतिशत तक हिस्सेदारी पहुंच जाए तो कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 846 मिलियन टन और 474 मिलियन एमटीओई (million tonne of oil equivalent) की तेल बचाया जा सकता है।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री बढ़ी

आर्थिक सर्वे में नीति आयोग का हवाला देते हुए कहा है कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री इजाफा हुआ है। 2018 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की लगभग 54,800 यूनिट्स की बिक्री हुई।
 

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