वाहनों में जरूरी हुआ एबीएस, जानें कैसे करता है काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में हर वर्ष करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। यानी हर रोज सड़क हासदों में 400 से ज्यादा लोगों की मौत होती है। सड़क हादसों में जान का जोखिम सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन पर सवार लोगों को होता है। भारत सरकार ने 2015 में ब्राजिलिया घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, इसका मकसद भारत में 2020 तक सड़क हादसों को आधे से ज्यादा कम करना था।
इसी कवायद के तहत केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम में कई बदलाव किए हैं, जिनमें सबसे अहम बदलाव है 125 सीसी से ज्यादा की क्षमता वाले दोपहिया वाहनों में 'एबीएस' को अनिवार्य करना। एबीएस यानी एंटी ब्रेक लॉकिंग सिस्टम। यह प्रणाली अचानक ब्रेक लगाने पर वाहन को फिसलने से बचाती है और जान बचाने के लिए बेहद जरूरी तकनीक साबित होती है।
हालांकि, यह तकनीक नई नहीं है। एबीएस का इस्तेमाल 1950 से अलग-अलग नाम से हो रहा है। इसमें कई तरह के सुधार भी हुए हैं। मौजूदा स्वरूप में इसका इस्तेमाल फोर्ड ने 1971 में ‘स्यॉर ब्रेक’ के नाम से किया था। इसके बाद से इसमें कई तरह के बदलाव हुए हैं। भारत में इस तकनीक का चलन अभी शुरू हुआ है।
खासतौर पर जब सरकार की तरफ से वाहनों में सुरक्षा मानकों में सुधार करने का इरादा जाहिर किया गया था। 16 मार्च, 2016 को केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने भारत के गजट पत्र में एक अधिसूचना प्रकाशित कर यह तय किया कि अप्रैल 2018 के बाद लॉन्च होने वाले 125 सीसी अथवा इससे ज्यादा क्षमता के सभी वाहनों में एबीएस प्रणाली लगाना अनिवार्य होगा।
1 अप्रैल, 2019 के बाद बनने वाले सभी 125 सीसी या इससे ज्यादा क्षमता के सभी वाहनों में एबीएस लगाना अनिवार्य हो जाएगा । नया वर्ष आने ही वाला है, यह नियम प्रभावी होगा, जब सभी वाहन निर्माताओं को इस नियम का पालन करना होगा। बहरहाल, देश में अफवाहें और गलत धारणाएं बहुत तेजी से फैलती हैं।
एबीएस के बारे में सबसे बड़ी भ्रांति यह है कि इससे तेज गति में चल रही गाड़ी को जल्दी रोका जा सकता है। जबकि सच यह है कि एबीएस से ब्रेक लगने और गाड़ी के रुकने के समय में कोई बदलाव नहीं होता है। असल में एबीएस का काम है, अचानक ब्रेक लगने पर गाड़ी को फिसलने से बचाना। जब बाइक में ब्रेक लगाते हैं, तो पूरा प्रेशर आगे की तरफ हो जाता है।
इसी मसौदे पर अग्रसर होते हुए भारत में अपने विकास पथ को जारी रखते हुए, प्रौद्योगिकी कंपनी कॉन्टिनेंटल ने गुड़गांव में एबीएस और ईएससी असेंबली के लिए दो नई लाइनों का उद्घाटन किया है। जो कि अप्रैल 201 9 में यात्री कारों और 2-व्हीलर के लिए एबीएस प्रविष्टि के लिए भारत सरकार के कानूनों से उत्पन्न बाजार आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
भारत में कॉन्टिनेंटल के वाहन डायनेमिक्स बिजनेस यूनिट के प्रमुख कृष्ण कोहली के मुताबिक, "कॉन्टिनेंटल की सुरक्षा प्रणाली दुनिया भर में सबसे उन्नत है, जो वाहनों की सभी श्रेणियों को पूरा करती है।
भारत में सुरक्षा प्रौद्योगिकियों को अपनाने की गति में वृद्धि हुई है, और हम अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने उत्पादों को स्थानीयकृत करना जारी रखेंगे। कुछ महीने पहले हमने गुड़गांव संयंत्र से इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक सिस्टम (ईबीएस) उत्पादन के 1 मिलियन यूनिट पूरे किए। "
सिंगल चैनल एबीएस आगे के पहिये पर लगा हुआ होता है। सुरक्षा के लिहाज से डुअल चैनल एबीएस ज्यादा प्रभावी होता है। क्योंकि अक्सर डुअल चैनल एबीएस के साथ इस तरह की प्रणाली जुड़ी होती है, जिससे यह तय होता है कि पिछले पहिये का जमीन से संपर्क बना रहे।
पिछले पहिये के जमीन के संपर्क से हटते ही एबीएस का इलेक्ट्रिक कंट्रोल यूनिट आगे के पहिये के ब्रेक थोड़े ढीले कर देता है, जिससे आगे प्रेशर कम हो जाता है और पिछला पहिया जमीन पर टिका रहता है। यदि बाइक में एबीएस नहीं है और अचानक ब्रेक लगाते हैं, तो पहिये जाम हो जाते हैं और बाइक का हैंडलबार जरा भी किसी दिशा में मुड़ता है, तो बाइक फिसल जाती है। जबकि एबीएस लगे होने पर ब्रेक लगाते हुए बाइक को किसी भी दिशा में मोड़ा जा सकता है।