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क्या होता है ग्रहों का गोचर, जानें सूर्य से लेकर राहु तक आपके ऊपर प्रभाव
Sat, 21 Dec 2019 03:22 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 21 Dec 2019 03:22 PM IST
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ग्रह गोचर
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गोचर
गोचर की सीधा संबंध सभी नौ ग्रहों और बारह राशियों से होता है। गोचर का अर्थ होता है ग्रहों का चलना। जब कोई ग्रह किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इस प्रकिया को गोचर कहा जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रह एक निश्चित अवधि में अपनी राशि बदलते हैं। सूर्य से लेकर केतु तक सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन का अवधि अलग-अलग होती है।
ग्रहों के गोचर की अवधि
सूर्य- एक महीने के अंतराल में अपनी राशि बदलता है।
चंद्रमा- को एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए लगभग सवा दिन का समय लगता है।
मंगल- करीब डेढ़ महीने की अवधि में अपनी राशि बदलता है।
बुध- लगभग 14 के अंतराल में राशि बदलता है।
वृहस्पति- एक साल में अपनी राशि को बदलता है। इसी तरह शुक्र लगभग 23 दिनों में गोचर होता है।
शनि- ढ़ाई साल में एक राशि से दूसरी राशि में जाता है।
राहु- और केतु- एक से डेढ़ वर्ष में गोचर
सूर्य का गोचर
राशि स्वामी- सिंह राशि
कारक- आत्मा का कारक
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
चंद्रमा का गोचर
राशि स्वामी- कर्क राशि
कारक- मन का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- चौथे, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।
मंगल का गोचर
राशि स्वामी- मेष और वृश्चिक
कारक- ऊर्जा, साहस और बल
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
बुध का गोचर
राशि स्वामी- मिथुन और कन्या राशि का स्वामी
कारक- बुद्धि, तर्कशास्त्र, संवाद का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- शेष भावों में परिणाम अच्छे नहीं
गुरु का गोचर
राशि स्वामी- धनु और मीन राशि का स्वामी
कारक- ज्ञान, संतान एवं परिवार का कारक
गोचर का शुभ फल- दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
शुक्र का गोचर
राशि स्वामी- वृषभ और तुला राशि का स्वामी
कारक- प्रेम, रोमांस, सुंदरता और कला
गोचर का शुभ फल- पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नौवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
शनि का गोचर
राशि स्वामी- मकर और कुंभ राशि का स्वामी
कारक- कर्म का कारक
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
राहु का गोचर
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- चतुरता, तकनीकी और राजनीति
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है।
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल।
केतु का गोचर
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- वैराग्य,आध्यात्म और मोक्ष
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से पहले, दूसरे,तीसरे, चौथे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल।
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गोचर की सीधा संबंध सभी नौ ग्रहों और बारह राशियों से होता है। गोचर का अर्थ होता है ग्रहों का चलना। जब कोई ग्रह किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इस प्रकिया को गोचर कहा जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रह एक निश्चित अवधि में अपनी राशि बदलते हैं। सूर्य से लेकर केतु तक सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन का अवधि अलग-अलग होती है।
ग्रहों के गोचर की अवधि
सूर्य- एक महीने के अंतराल में अपनी राशि बदलता है।
चंद्रमा- को एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए लगभग सवा दिन का समय लगता है।
मंगल- करीब डेढ़ महीने की अवधि में अपनी राशि बदलता है।
बुध- लगभग 14 के अंतराल में राशि बदलता है।
वृहस्पति- एक साल में अपनी राशि को बदलता है। इसी तरह शुक्र लगभग 23 दिनों में गोचर होता है।
शनि- ढ़ाई साल में एक राशि से दूसरी राशि में जाता है।
राहु- और केतु- एक से डेढ़ वर्ष में गोचर
सूर्य का गोचर
राशि स्वामी- सिंह राशि
कारक- आत्मा का कारक
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
चंद्रमा का गोचर
राशि स्वामी- कर्क राशि
कारक- मन का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- चौथे, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।
मंगल का गोचर
राशि स्वामी- मेष और वृश्चिक
कारक- ऊर्जा, साहस और बल
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
बुध का गोचर
राशि स्वामी- मिथुन और कन्या राशि का स्वामी
कारक- बुद्धि, तर्कशास्त्र, संवाद का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- शेष भावों में परिणाम अच्छे नहीं
गुरु का गोचर
राशि स्वामी- धनु और मीन राशि का स्वामी
कारक- ज्ञान, संतान एवं परिवार का कारक
गोचर का शुभ फल- दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
शुक्र का गोचर
राशि स्वामी- वृषभ और तुला राशि का स्वामी
कारक- प्रेम, रोमांस, सुंदरता और कला
गोचर का शुभ फल- पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नौवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
शनि का गोचर
राशि स्वामी- मकर और कुंभ राशि का स्वामी
कारक- कर्म का कारक
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल
राहु का गोचर
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- चतुरता, तकनीकी और राजनीति
गोचर का शुभ फल- तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है।
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल।
केतु का गोचर
राशि स्वामी- कोई नहीं ( छाया ग्रह)
कारक- वैराग्य,आध्यात्म और मोक्ष
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से पहले, दूसरे,तीसरे, चौथे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी भाव में अशुभ फल।