{"_id":"63188e842fdcc7496114a8e1","slug":"what-is-panchang-different-types-of-panchang-know-which-panchangam-is-best-in-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchang ke Ang: पंचांग क्या है? जानें पंचांग के अंगों के बारे में","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
Panchang ke Ang: पंचांग क्या है? जानें पंचांग के अंगों के बारे में
Wed, 07 Sep 2022 05:58 PM IST
श्वेता सिंह
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Wed, 07 Sep 2022 05:58 PM IST
सार
काल गणना की रीति से बने हुए कालदर्शक को पंचांग कहते हैं। पंचांग को पंचांग इसीलिए कहते हैं क्योंकि इसके पांच प्रमुख अंग हैं।
विज्ञापन
पंचांग का शाब्दिक अर्थ है पांच अंग।
विस्तार
Panchang ke Ang: हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है। भारत में पंचांग के कई प्रकार हैं। पंचांग का शाब्दिक अर्थ है पांच अंग। काल गणना की रीति से बने हुए कालदर्शक को पंचांग कहते हैं। पंचांग को पंचांग इसीलिए कहते हैं क्योंकि इसके पांच प्रमुख अंग हैं। इसकी गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धाराएं हैं, पहली चंद्र पर आधारित, दूसरी नक्षत्र पर आधारित और तीसरी सूर्य पर आधारित है। आइए जानते हैं पंचांग के अंगों के बारे में।
विज्ञापन
पंचांग के पांच अंग
पंचांग का निर्माण पांच अंगों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर होता है। आइए जानते हैं इन अंगों के बारे में।
तिथि: चन्द्र और सूर्य के अन्तर अंशों के मान यदि 12 अंश के हो तो वो एक तिथि कहलाती है। वही अंतर जब 180 अंशों का होता है तो उसे पूर्णिमा कहते हैं जब यह अंतर 0 या 360 अंशों का होता है तो उसे अमावस कहते हैं। चन्द्रमा की एक कला को तिथि कहते हैं। एक मास में लगभग 30 तिथि होती हैं। इसमें 15 तिथि कृष्ण पक्ष की और 15 तिथि शुक्ल पक्ष की होती हैं।
विज्ञापन
वार: वार के बारेमें सबको जानकारी है। एक सूर्योदय से दूसरे दिन के सूर्योदय तक की कलावधि को वार कहते हैं। वार सात होते हैं।
नक्षत्र: नक्षत्र 27 होते हैं। प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 9 चरणों के मिलने से एक राशि बनती है। 27 नक्षत्रों के नाम इस प्रकार हैं: अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा , आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य,अश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त,चित्रा, स्वाती, विशाखा,अनुराधा,ज्येष्ठा,मूल,पूर्वाषाढ़ा,उत्तरआषाढ़, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती।
विज्ञापन
योग: सूर्य चन्द्रमा के संयोग से योग बनता है ये भी 27 होते हैं। जिन्हें विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, घृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रव, व्याघात, हर्षल, वङ्का, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान, परिधि, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, ऐन्द्र, वैघृति।
करण: तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं यानि एक तिथि में दो करण होते हैं। करण के नाम इस प्रकार हैं बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज्य, विष्टी (भद्रा), शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किंस्तुघन।