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Hindi News ›   Astrology ›   Vivah Muhurat November December 2022 Know Marriage Dates and Shubh Muhurat In Nov Dec

Vivah Muhurat 2022: नवंबर से बजेंगी शादी की शहनाइयां, जानें विवाह के शुभ मुहूर्त

Mon, 31 Oct 2022 02:33 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 31 Oct 2022 02:33 PM IST
सार

देवशयनी एकादशी 4 नवंबर, शुक्रवार को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन इस दिन से भगवान विष्णु अपना कार्यभार संभालते हैं और इसके अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस बार तुलसी विवाह भी 5 नवंबर को है। आइए जानते हैं इस बार के विवाह के शुभ मुहूर्त के बारे में। 

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Vivah Muhurat November December 2022 Know Marriage Dates and Shubh Muhurat In Nov Dec
विवाह के शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Vivah Muhurat 2022: जुलाई माह में देवशयनी एकादशी से श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। उनके योग निद्रा के साथ सभी शुभ और मांगलिक कार्य चार माह के लिए बंद हो जाते हैं। उसके बाद देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त होता है और इसी दिन से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए शुभ समय देखना आवश्यक होता है। इस बार देवशयनी एकादशी 4 नवंबर, शुक्रवार को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन इस दिन से भगवान विष्णु अपना कार्यभार संभालते हैं और इसके अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस बार तुलसी विवाह भी 5 नवंबर को है। आइए जानते हैं इस बार के विवाह के शुभ मुहूर्त के बारे में। 

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देव उठनी एकादशी पर नहीं है कोई भी मुहूर्त 
देव उठनी एकादशी 4 नवंबर को है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दौरान सूर्य की स्थिति विवाह के लिए उचित नहीं है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो सूर्य इस दौरान वृश्चिक राशि में सूर्य न होने के कारण देव उठने के बाद भी विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं है।
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नंवबर 2022 में विवाह के मुहूर्त 
21 नवंबर 2022
24 नवंबर 2022
25 नवंबर 2022
27 नवंबर 2022

दिसंबर 2022 में विवाह के मुहूर्त 
2 दिसंबर 2022
7 दिसंबर 2022
8 दिसंबर 2022
9 दिसंबर 2022
14 दिसंबर 2022 

देवोत्थान एकादशी पर क्यों करते हैं शुभ कार्य? 
कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। कहते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 माह शयन के बाद जागते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, इसीलिए देवोत्थान एकादशी पर श्री हरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है।

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