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वास्तु के अनुसार भूमि चयन कर आप रह सकते हैं सुखी और समृद्धि

Mon, 02 Mar 2020 06:18 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 02 Mar 2020 06:18 AM IST
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vastu tips vastu related important rules of land
vastu tips

वास्तुशास्त्र में माना गया है कि दुकान या प्लॉट खरीदने से पहले उसके चारों ओर की बनावट, वातावरण और मूलभूत ढांचे की समीक्षा कर लेनी चाहिए। भवन निर्माण से पूर्व उचित भूखंड का चयन कर उसका भूमि परीक्षण किया जाना चाहिए। ऐसा करने से भवन निर्माण के उपरांत वहां निवास करने वाले सदस्य अनेक प्रकार की परेशानियों से बच सकते हैं। जिस जगह वास्तु कार्य होना है, उस जगह के वातावरण के साथ पानी की व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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मिट्टी के द्वारा पहचान-
जिस भूखंड को आप खरीदने जा रहे हैं उसकी ऊपरी मिट्टी की परत को हटाकर थोड़ी नीचे की मिट्टी को हाथ में लेकर देखने से इसका रंग आसानी से पता लग जाता है और सूंघकर इसकी गंध व चखकर इसका स्वाद मालूम हो जाता है। यदि श्वेत रंग की मिट्टी सुगंध और मिठास लिए हुए है तो इसे ब्राह्मणी मिट्टी कहते हैं। आध्यात्मिक सुख प्रदान करने वाली ऐसी मिट्टी वाले भूखंड पर निर्मित भवन बुद्धिजीवियों, धार्मिक व्यक्तियों के लिए अनुकूल होते हैं। 
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क्षत्रिया मिट्टी लाल रंग, तीखी गंध और तीखे कसैले स्वाद वाली होती है। वर्चस्व और पराक्रम को बढ़ाने वाली ऐसी मिट्टी के भूखंड प्रशासकों और राजकीय अधिकारियों के लिए उपयुक्त होते हैं। हल्के पीले रंग की हल्की गंध और खटास वाली मिट्टी वैश्य मिट्टी कहलाती है। व्यवसायी और व्यापारी वर्ग के लिए ऐसे स्थान पर आवास बनाना लाभकारी माना गया है जो धन-धान्य से पूर्ण करती है। 
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तीखी हल्की गंध और कड़वे स्वाद वाली काली मिट्टी को शुद्ध मिट्टी कहा जाता है। इस प्रकार की मिट्टी वाले भूखंड पर निर्माण करना सभी के लिए उपयुक्त है।

गड्ढे द्वारा भूखंड का परीक्षण -
जहाँ निर्माण करना हो, उस स्थान पर गृह स्वामी की कुहनी से मध्यमा अंगुली तक की लम्बाई नापकर उसी नाप का गहरा ,लम्बा व चौड़ा गड्ढा कर लें एवं निकली हुई  मिट्टी से गड्ढे को पुनः भर दें । यदि मिट्टी कम पड़े तो हानि ,बराबर रहे तो न हानि न लाभ तथा मिट्टी शेष बच जाए तो ऐसी भूमि को सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाली समझना चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान-
1 जहां आप निर्माण करना चाहते हैं उसके आस-पास के स्थान पर गंदा नाला व वर्कशॉप आदि नहीं होना चाहिए।
2 किसी भी गली या आवास स्थल की कतार में अंतिम मकान कभी नहीं खरीदना चाहिए। एकदम सड़क के किनारे बना हुआ मकान भी शुभ नहीं माना गया है।
3 तीन कोणों से युक्त तिकोनी भूमि कभी नहीं खरीदनी चाहिए। एक तरफ अधिक चौड़ा एवं एक तरफ कम चौड़ा प्लॉट भी अशुभ होता है,अर्थात अनियमित आकार के भूखंड वास्तु सम्मत नहीं माने गए हैं ।
4 हवा, पानी, प्रकाश, चौड़ी गली देखकर ही भूखंड का चयन करना अच्छा रहता है एवं ढलान व डूब वाले स्थान में मकान नहीं बनाना चाहिए। 
5  प्लॉट पर जहां घर का मुख्य द्वार बनाना हो उसके सामने कोई बिजली का खम्भा,बड़ा पेड़ या गड्ढा के सामने, नहीं होना चाहिए ऐसा होना कष्टकारक माना गया है।
6 दो बड़े मकानों के बीच में एक छोटा मकान हो, तो छोटा मकान रहने वालों के लिए हानिकारक होता है।इसी प्रकार मकान के आसपास मंदिर, मस्जिद, मीनार या नाला शुभ नहीं है।

7 भूखंड की खुदाई में कपाल,बाल,हड्डी,कोयला,कपडा,जली लकड़ी,चींटियां,सर्प,कौड़ी,रुई अथवा लोहा मिले तो अनिष्ट होता है। लेकिन पत्थर मिलें तो धनलाभ,ईंट मिलें तो बढ़ोत्तरी एवं तांबे के सिक्के आदि निकलें तो ऐसी भूमि सुख-समृद्धि दायक होती है। 

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