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Vastu Tips: घर के वास्तु से रिश्तों को कैसे बेहतर बनाएं, जानिए वास्तु के 5 आसान नियम
Sun, 16 Feb 2025 11:34 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 16 Feb 2025 11:34 AM IST
सार
घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार को उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर रखना शुभ माना जाता है।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार को उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर रखना शुभ माना जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के सिद्धांत न केवल घर की भौतिक संरचना को संतुलित करते हैं, बल्कि हमारे मानसिक, भावनात्मक और पारस्परिक संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। अगर आप अपने घर के वास्तु को सही दिशा में तैयार कर लेते हैं तो यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच समझदारी, प्रेम और सहयोग बढ़ता है।
1. प्रवेश द्वार का महत्व
घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार को उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर रखना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो पारिवारिक सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और विश्वास को बढ़ाता है। इसके अलावा, द्वार के पास साफ-सफाई और सजावट पर विशेष ध्यान दें ताकि आगंतुकों को भी घर की सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो।
2. बैठक कक्ष का आयोजन
बैठक कक्ष परिवार के मेल-मिलाप का केंद्र होता है। इसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखने से घर में सामंजस्य और सकारात्मकता बनी रहती है। बैठक कक्ष में आरामदायक सोफे, प्राकृतिक रंगों की दीवारें और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था रखने से माहौल सुखद बनता है। एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित बैठक कक्ष सदस्यों के बीच खुलकर संवाद करने में सहायक होता है, जिससे रिश्तों में गर्मजोशी और समझदारी आती है।
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3. रसोई और भोजन कक्ष का स्थान
वास्तु के अनुसार, रसोई घर का वह हिस्सा है जहाँ परिवार के लिए पोषण और ऊर्जा का निर्माण होता है। इसे आग्नेय कोण में रखना उत्तम माना जाता है। यदि रसोई घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में स्थित हो तो परिवार के सदस्यों के बीच सहयोग और सामंजस्य बढ़ता है। भोजन कक्ष में एक साथ बैठकर खाना खाने से परिवार में एकता और आपसी समझ में वृद्धि होती है। साथ ही, रसोई के आस-पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने से घर में स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है।
शयनकक्ष को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना उत्तम माना जाता है, जिससे घर में स्थिरता और शक्ति बनी रहती है। सही दिशा में सजा यह कमरा परिवार के सदस्यों को आराम प्रदान करता है और व्यक्तिगत तनाव को कम करता है। जब मन शांत रहता है, तो रिश्तों में समझदारी और सहानुभूति का संचार होता है।
घर की सजावट में प्राकृतिक तत्वों का समावेश करें। हरे पौधे, प्राकृतिक चित्र और हल्के रंग की दीवारें सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं। वास्तु के अनुसार, लाल, नारंगी और पीले जैसे जीवंत रंग रिश्तों में जोश और उत्साह लाते हैं, जबकि शांत और सूक्ष्म रंग शांति और संतुलन का अनुभव कराते हैं। सही रंगों का चयन परिवार के सदस्यों के मनोभावों में संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
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1. प्रवेश द्वार का महत्व
घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार को उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर रखना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो पारिवारिक सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और विश्वास को बढ़ाता है। इसके अलावा, द्वार के पास साफ-सफाई और सजावट पर विशेष ध्यान दें ताकि आगंतुकों को भी घर की सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो।
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2. बैठक कक्ष का आयोजन
बैठक कक्ष परिवार के मेल-मिलाप का केंद्र होता है। इसे उत्तर या पूर्व दिशा में रखने से घर में सामंजस्य और सकारात्मकता बनी रहती है। बैठक कक्ष में आरामदायक सोफे, प्राकृतिक रंगों की दीवारें और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था रखने से माहौल सुखद बनता है। एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित बैठक कक्ष सदस्यों के बीच खुलकर संवाद करने में सहायक होता है, जिससे रिश्तों में गर्मजोशी और समझदारी आती है।
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वास्तु के अनुसार, रसोई घर का वह हिस्सा है जहाँ परिवार के लिए पोषण और ऊर्जा का निर्माण होता है। इसे आग्नेय कोण में रखना उत्तम माना जाता है। यदि रसोई घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में स्थित हो तो परिवार के सदस्यों के बीच सहयोग और सामंजस्य बढ़ता है। भोजन कक्ष में एक साथ बैठकर खाना खाने से परिवार में एकता और आपसी समझ में वृद्धि होती है। साथ ही, रसोई के आस-पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने से घर में स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है।
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4. शयनकक्ष का सही चयनशयनकक्ष को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना उत्तम माना जाता है, जिससे घर में स्थिरता और शक्ति बनी रहती है। सही दिशा में सजा यह कमरा परिवार के सदस्यों को आराम प्रदान करता है और व्यक्तिगत तनाव को कम करता है। जब मन शांत रहता है, तो रिश्तों में समझदारी और सहानुभूति का संचार होता है।
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5. सजावट और रंगों का चयनघर की सजावट में प्राकृतिक तत्वों का समावेश करें। हरे पौधे, प्राकृतिक चित्र और हल्के रंग की दीवारें सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं। वास्तु के अनुसार, लाल, नारंगी और पीले जैसे जीवंत रंग रिश्तों में जोश और उत्साह लाते हैं, जबकि शांत और सूक्ष्म रंग शांति और संतुलन का अनुभव कराते हैं। सही रंगों का चयन परिवार के सदस्यों के मनोभावों में संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
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