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Vastu Tips For Home: वास्तु टिप्स से जानें घर में कौनसी चीज कहां होनी चाहिए
Mon, 12 Oct 2020 01:11 PM IST
रुस्तम राणा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Mon, 12 Oct 2020 01:11 PM IST
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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व
- फोटो : vastu tips
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Vastu Tips For Home: वास्तु के अनुसार, घर बनवाते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। वास्तु विज्ञान का संबंध भवन निर्माण से है। इसमें दिशाओं का अध्ययन करके घऱ में कौनसी चीज कहां होनी चाहिए इसका विचार किया जाता है। घर में वास्तु के नियम का ध्यान न रखने के पर घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं घर में किस दिशा में क्या होना चाहिए -
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1. उत्तर दिशा: वास्तु के अनुसार, उत्तर दिशा कुबेर देवता की होती है। इस दिशा में तिजोरी रखना चाहिए अथवा धन के आगमन के लिए इस दिशा को खाली रखना चाहिए।
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2. पूर्व दिशा: घर की पूर्व दिशा को खाली रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य देव और इंद्र देव हैं।
3. दक्षिण दिशा: वास्तु के नियमानुसार, घर की दक्षिण दिशा में भारी सामान होना चाहिए। इस दिशा में खुलापन या शौचालय नहीं होना चाहिए। यह यम के आधिपत्य एवं मंगल ग्रह के पराक्रम वाली दक्षिण दिशा पृथ्वी तत्व की प्रधानता वाली दिशा है।
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4. पश्चिम दिशा: इस दिशा के देवता वरूण और ग्रह स्वामी शनि है। इस दिशा में आपका रसोईघर या टॉयलेट होना चाहिए। लेकिन रसोईघर और टॉयलेट पास-पास न हो, इसका भी ध्यान रखें।
5. ईशान कोण: यह घऱ की उत्तर पूर्व की दिशा होती है। वास्तु के नियम के अनुसार यह दिशा में पूजा घर होना चाहिए। घर की इस दिशा में भगवान शिव का स्थान माना जाता है जबकि गुरु ग्रह इस दिशा के स्वामी है।
6. आग्नेय कोण: इसे घर का आग्नेय कोण कहते हैं। यह घर की दक्षिण पूर्व दिशा होती है। यह अग्नि तत्व की दिशा है। इस दिशा में गैस, इलेक्ट्रॉनिक सामान होना चाहिए।
7. नैऋत्य कोण: यह घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा होती है। इस दिशा में खुलापन अर्थात खिड़की, दरवाजे बिलकुल ही नहीं होना चाहिए। घर के मुखिया का कमरा यहां बना सकते हैं। वास्तु के नियमानुसार इस दिशा में पृथ्वी तत्व का स्थान है और इस दिशा के स्वामी राहु और केतु है।
8. वायव्य कोण: यह घर की उत्तर पश्चिम दिशा होती है। इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि होना चाहिए। वास्तु के नियमानुसार इस दिशा में वायु का स्थान है और इस दिशा के स्वामी ग्रह चंद्र है।