नवरात्र में माता की प्रसन्नता के लिए रखें वास्तु का ध्यान
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शारदीय नवरात्र यानी शुक्लपक्ष प्रतिपदा से लेकर विजयादशमी तक जगह-जगह रामलीला और मां दुर्गा के पंडाल का आयोजन होता है, जिससे पूरा माहौल पवित्र और धार्मिक भावों से परिपूर्ण हो जाता है। हर जगह उमंग का संचार रहता है।
ऐसे पवित्र वातावरण में जब हम मां दुर्गा की भक्ति में लीन होते हैं, तो मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या हम जो पूजा कर रहे हैं, वह सही है या नहीं।
इसके संदर्भ में दुर्गा सप्तशती जिसका हम नवरात्रों में पाठ करते हैं, क्षमा प्रार्थना का प्रावधान है, जिसमें यह दिया गया है कि आपने चाहे जिस भी विधि से पूजा की हो, अगर आप पाठ के अंत में दुर्गा सप्तशती के क्षमा प्रार्थनाओं को पढ़ लेते हैं, तो फिर आपकी प्रार्थना को मां भगवती स्वीकार करती हैं और पूजा करने वाले को सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं।
इसलिए जब भी मां भगवती की पूजा करें, तो न केवल सच्चे मन से करें बल्कि सही तरीके से करें।
दुर्गा पूजा में वास्तु
हर दिशा के अपने खास देवी-देवता होते हैं, इसलिए विभिन्न देवी-देवताओं के क्षेत्र के लिए जो दिशा निर्धारित हो, उनकी पूजा उसी दिशा में करनी चाहिए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता का क्षेत्र दक्षिण दिशा है, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि माता की पूजा करते समय हमारा मुख दक्षिण या पूर्व दिशा में ही रहे।
पूर्व दिशा की ओर मुख करके मां का ध्यान करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और हमारा सीधा जुड़ाव माता से होता है।
पूजा संबंधी सामान किस दिशा में रखें
जब आप माता की पूजा की तैयारी कर रही हों, तो पूजा संबंधी सारा सामान पूजा कक्ष के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें। इस कमरे में हल्के पीला, हरा या फिर गुलाबी रंग को प्रमुखता दें। इससे पूजा कक्ष में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई बार पूजा करते हुए न चाहते हुए भी ध्यान भटकने लगता है।
इसके लिए आप घर के उत्तर-पूर्व वास्तु जोन में प्लास्टिक या लकड़ी का बना पिरामिड रख सकती हैं। इससे माता का ध्यान करने में आसानी होती है। पिरामिड रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि पिरामिड नीचे से खोखला हो।
वास्तुशास्त्र के प्राचीन ग्रंथों में मंदिरों और घरों में किसी भी शुभ काम को करने से पूर्व हल्दी से या फिर सिंदूर से स्वातिस्क का प्रतीक चिन्ह बनाया जाता रहा है।
अगर इन प्रतीकों का सही दिशा में प्रयोग किया गया हो, तो ये हमारे जीवन में सकारात्मकता लेकर आते हैं, जो कि पारिवारिक खुशी, प्यार व सुख-समृृिद्ध के लिए जरूरी है।
दुर्गा पूजा में साफ-सफाई
नवरात्रों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इस समय हम सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं, ताकि हमारे घर में प्रेम का साम्राज्य रहे और जीवन में सुख-समृद्घि का वास हो।
साफ-सुथरा घर न केवल हमारे मन को सुकून देता है, वरन् मां की आराधना करते समय हमारा ध्यान उनकी ओर केंद्रित करता है।
कहा भी गया है कि साफ-सुथरे व्यवस्थित घर में ही देवी-देवताओं का वास होता है और जहां देवी-देवता वास करें, यकीनन वहां सुख-समृद्घि और खुशियों का वास होता है।