फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   Vaastu ›   do not decide direction by position of the sun know why

सूर्य को देख कर दिशा तय न करें, जानिए ऐसा क्यों

Thu, 28 Jun 2018 12:48 PM IST
रमेश चिंतक, ज्योतिषाचार्य
रमेश चिंतक, ज्योतिषाचार्य Updated Thu, 28 Jun 2018 12:48 PM IST
विज्ञापन
do not decide direction by position of the sun know why

घर की छत पर खड़े होकर हर दिन सूर्योदय देखते रहने से पता चलता है कि सूर्य भी अपना स्थान बदलता रहता है। अकसर ऐसा देखा गया है कि लोग दिशाओं का निर्धारण सूर्य से करते हैं, जिस दिशा से सूर्य उदय होता है उसे पूरब मानकर चारों कोण और दिशाएं निश्चित कर लेते हैं पर हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि सूर्य उत्तरायण और दक्षिणायण हुआ करते हैं।

विज्ञापन


मकर संक्रांति के बाद सूर्य उत्तरायण और कर्क संक्रांति के बाद दक्षिणायण होते हैं। अगर आप अपनी छत पर खड़े होकर प्रतिदिन सूर्योदय देखते हैं तो आपको मालूम होगा कि सूर्य के उदय का स्थान बदलता रहता हैं। इसलिए सूर्य उदय के स्थानपर ही ठीक पूरब दिशा मान लेना उचित नहीं होगा क्योंकि सूर्य उदय का स्थान निश्चित नहीं है, यह उत्तर या दक्षिण की ओर अयन के आधार पर खिसकता रहता हैं। अतः इस आधार पर दिशा निर्धारण करना उचित नहीं है क्योंकि उसके निर्धारण के लिए एक स्थिर बिंदु चाहिए।
विज्ञापन


प्राचीन काल में लोग दिशा ज्ञान के लिए ध्रुव तारे को आधार मानते थे जो वैज्ञानिक रूप से भी यह सही लगता है। ध्रुव तारा ठीक उत्तर में हैं और इसका नाम ध्रुव इसलिए है कि यह अडिग है, स्थिर है, इसमें विचलन नहीं है। वैज्ञानिक कहते हैं कि पृथ्वी के उत्तरी मध्य बिंदु उत्तरी ध्रुव से एक सीधी रेखा उत्तर की ओर ही खींचते चले जाएं तो यह सीधे ध्रुव तारे पर जाकर मिलेगी। यानि कि घूमती पृथ्वी का उत्तरी बिंदु सीधे ध्रुव तारे की सीध में रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह तो सब जानते हैं कि उत्तर की ओर से चुंबकीय तरंगों का प्रवाह सतत दक्षिण की ओर बहा करता हैं। वास्तु में इसलिए उत्तर दिशा को कुबेर का स्थान कहते हैं। क्योंकि इसी ओर से सदा तरंगों का आबाद आगमन होता हैं। इन तरंगों के उचित उपयोग के सिद्धांत ही वास्तु शास्त्र के मूल आधार हैं। उत्तर जीवन की दिशा है, स्थायित्व की दशा हैं। हमारे ऋषियों ने उत्तर को कुबेर और दक्षिण को यम की दिशा बतलाया है। उत्तर को जीवन और दक्षिण को मृत्यु या उत्तर को आगमन और दक्षिण को निगमन की दिशा बताया हैं।

कंपास बेहद जरुरी
दिशाओं का निर्धारण उत्तर से होना चाहिए। इसके लिए दिशा बोधक यंत्र या कुतुबनुमा (कंपास) का प्रयोग करना चाहिए। कंपास की सुई उत्तर दिशा में रहती हैं क्योंकि वह उत्तर से आती हुई ऊर्जा तरंगों से आकर्षित रहती हैं। इस दिशा सूचक यंत्र के किसी भी भूखंड की चारों दिशाओं और चारों कोणों का ज्ञान आसानी से हो जाता हैं। भूखंड की दिशाओं को ज्ञात करना हो, उस भूखंड के मध्य में एक कंपास रख दीजिए। कंपास के तीर के आकार की सुई उत्तर दिशा की ओर ही होगी, इसे देखकर आप उस भूखंड के उत्तर-दक्षिण एक रेखा खींच दीजिए, इससे आपका भूखंड दो बराबर भागों में बंट जाएगा। 


वास्तु में खुला स्थान भी लें कुछ लोगों को यह शंका होती है कि निर्मित भवन पर ही वास्तु को प्रभावी माना जाए या भवन के आगे पीछे जो लॉन, बगीचा या चहारदीवारी के अंदर छूटा हुआ जो स्थान है, उस पर प्रभावी न माना जाए। यह भ्रांति मात्र है। वास्तु में दिशा निर्धारण और पद विन्यास पूरी चहारदीवारी का ही होता है। इसमें निर्माण किए जाने वाला क्षेत्र और चहारदीवारी के अंदर का छूटा हुआ क्षेत्र दोनों शामिल हैं, इसमें संदेह नहीं करना चाहिए। अमूमन देखा यह गया है कि उचित ज्ञान या मार्ग दर्शन के अभाव में लोगों को इस संदेह के कारण बहुत असुविधा उठानी पड़ी, क्योंकि यह वास्तु शास्त्र का प्रारंभिक अनिवार्य बिंदु है, जिसके गलत होने पर आगे के सारे सिद्धांत अर्थहीन हो जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed