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वास्तु टिप्स: अस्पताल बनवाते समय भी रखना चाहिए वास्तु के नियमों का ध्यान

Sun, 08 Apr 2018 04:58 PM IST
प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तुविद
प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तुविद Updated Sun, 08 Apr 2018 04:58 PM IST
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according to vastu keep these things at the time of hospitalization

विभिन्न रोगों के उपचार के लिए मरीज और उनके घर वाले डॉक्टर, वैद्य, हकीम के क्लीनिक, हॉस्पिटल या नर्सिंग होम से संपर्क करते हैं। अगर वहां वास्तु  नियमों का ध्यान रखा गया होगा, तो वहां उपचार हेतु भर्ती मरीजों के शीघ्र  स्वस्थ्य होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं। ऐसे हॉस्पिटल में मरीजों की  मृत्यु दर बहुत ही कम होती है। इसलिए मरीजों के हित और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ  के लिए हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में वास्तु नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। सही दिशा से अधिक लाभ हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में होना सबसे अच्छा माना गया है।

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 डॉक्टर का परामर्श कक्ष उत्तर में, ऑपरेशन थियेटर पश्चिम में, कैश काउंटर दक्षिण-पश्चिम में, मरीजों के साथ आए हुए परिजनों के लिए वेटिंग रूम दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में एक्स-रे, अल्ट्रासॉउन्ड, एमआरआई आदि मशीन एवं उपकरणों  के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सर्वोत्तम रहती है। मरीजों के लिए जनरल एवं प्राइवेट वार्ड के कक्ष उत्तर, पश्चिम अथवा उत्तर-पश्चिम दिशा में ही रखने चाहिए। ऊपर की मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियां  पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण अथवा दक्षिण-पूर्व दिशा में बनवाई जा सकती हैं।
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 सीढ़ियों की संख्या सदैव विषम में जैसे 11, 15, 17, 23 होनी चाहिए। उत्तर-पूर्व दिशा में सीढ़ियों का निर्माण नहीं कराना चाहिए। मध्य भाग को रखें खाली किसी भी वास्तु का मध्य भाग ब्रह्म स्थल होता है, इसलिए  हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में भी मध्य भाग को खुला, खाली और साफ-सुथरा रखना आवश्यक है। मंदिर या पूजा स्थल उत्तर-पूर्व में ही बनवाना चाहिए। पीने के पानी की व्यवस्था भी उत्तर-पूर्व में ही की जानी चाहिए। नहाने के लिए बाथरूम उत्तर या पूर्व में, जबकि शौचालय दक्षिण या पश्चिम में बनवाना उपयुक्त माना गया है। 

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आपातकालीन कक्ष के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा को प्रयोग में लाना चाहिए। सही रंगों का करें चुनाव हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम की दीवारों पर सफेद या हल्का नीला रंग कराना चाहिए। मरीजों के लिए बेड पर चादर का रंग सफेद हो, जबकि ओढ़ने के लिए कंबल लाल रंग का हो। खिड़कियों और दरवाजों पर हरे रंग के परदे अधिक लाभकारी होते हैं। हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में सही रंगों का प्रयोग मरीजों को प्रसन्न और स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसलिए हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में रंग-बिरंगे कपड़े कर्मचारियों को नहीं पहनने चाहिए।

हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों के पैर कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं होने चाहिए। ऑपरेशन करते समय भी मरीज का सिर दक्षिण दिशा में ही  रहे, जबकि डॉक्टर का चेहरा पूर्व या उत्तर की ओर रहे। जिस भूखंड पर  हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम बना हो, उसका ढलान पूर्व या उत्तर दिशा में होना शुभ होता है। दक्षिण की ओर ढलान होना अशुभ  है। मरीजों को देखते समय डॉक्टर का चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में होना जरूरी है।

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