Solar Eclipse 2021: इस दिन लग रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानिए इससे जुड़ी 10 खास बातें
- 10 जून 2021 को लगने जा रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण
- भारत में आंशिक रहेगा यह सूर्य ग्रहण, सूतक काल नहीं होगा मान्य
- इस बार कई अन्य देशों में दिखाई देगा 'रिंग ऑफ फायर' का अद्भुत नजारा
- शनि जयंती, वट सावित्री के साथ सूर्य ग्रहण लगना खास घटना
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विस्तार
जब एक खगोलीय पिंड दूसरे खगोलीय पिंड की छाया से ढक जाता है और पृथ्वी पर उससे आने वाला प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है, तब उसे ग्रहण कहा जाता है। इसे सीधे शब्दों में कहा जाए तो सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा परिक्रमा करते हुए एक ही सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा की छाया सूर्य पर पड़ने लगती है तब सूर्य ग्रहण पड़ता है। इसलिए ग्रहण लगना पूरी तरह से एक खगोलीय घटना होती है लेकिन इसका ज्योतिष और पौराणिक महत्व भी माना जाता है। ग्रहण दो तरह से लगता है एक पूर्ण और दूसरा आंशिक जब एक खगोलीय पिंड से दूसरा खगोलीय पिंड पूरी तरह से ढक जाता है और केवल उसके किनारे दिखते हैंं, जिसके कारण पूरी तरह से प्रकाश अवरूद्ध हो जाता है, तब वह पूर्ण ग्रहण कहलाता है। इसी तरह जब खगोलीय पिंड पर दूसरे पिंड की हल्की छाया पड़ती है और पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश पूरी तरह से अवरुद्ध नहीं होता है तो वह आंशिक ग्रहण कहलाता है। वर्ष 2021 का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को लगने जा रहा है। तो चलिए जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी खास बातें।
1. इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून 2021 दिन गुरुवार को लगने जा रहा है। दोपहर 01 बजकर 42 मिनट से सूर्य ग्रहण आरंभ हो जाएगा जो शाम 06 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण की कुछ अवधि लगभग पांच घंटो की होगी।
2. सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है। इस बार वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण ज्येष्ठ अमावस्या को लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र और वृषभ राशि में लगने जा रहा है।
3. इस बार सूर्य ग्रहण लगने की घटना बहुत खास है क्योंकि इसी दिन शनि जयंती के साथ वट सावित्री व्रत भी किया जाएगा।
4. यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जो भारत के कुछ स्थानों से ही दिखाई देगा लेकिन वह भी आंशिक रूप से ही होगा। यही कारण है कि भारत में इस ग्रहण का सूतककाल मान्य नहीं होगा।
5. इस बार लगने वाले सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के 97 प्रतिशत भाग को अपनी छाया से ढक लेगा। जिसके कारण चंद्रमा की छाया से सूर्य के चारों ओर वलयाकार यानी रिंग के समान आकृति बन जाएगी।
6. जब चंद्रमा सूर्य के बीचे के भाग को पूरी तरह ढक लेता है और केवल उसके चमकीले किनारे नजर आते हैं तो उसे 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। इस बार के सूर्य ग्रहण में लोगों को यही अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।
7. यह ग्रहण कनाडा, रूस, ग्रीनलैंड में देखा जा सकेगा। यहां पर यह सूर्य ग्रहण पूर्ण होगा। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों, यूरोप और उत्तर एशिया में भी यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।
8. जहां ग्रहण की पूरी अवधि पांच घंटो की होगी तो वहीं वलयाकार सूर्य ग्रहण यानी रिंग ऑफ फायर की अवधि भी 3 घंटे 44 मिनट लंबी होगी।
9. इस दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती है लेकिन भारत में यह सूर्य ग्रहण आंशिक होने के कारण किसी शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ की मनाही नहीं होगी।
10. यह इस वर्ष का दूसरा ग्रहण और पहला सूर्य ग्रहण होगा। इससे पहले चंद्रग्रहण लगा था। 15 दिन में दो ग्रहण लगना भी बहुत खास माना जा रहा है।