शनि जयंती पर इन 5 मंत्रों से दूर करें शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव, 5 राशियां हैं घेरे में
- 22 मई को शनि जयंती है।
- शनि जयंती के दिन कुछ उपाय करने से दूर हो जाते शनि दोष
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शनि जयंती का दिन शनिदेव को प्रसन्न करने का होता है। इस बार शनि जयंती विशेष योग में आ रही है। शनि जयंती 22 मई शुक्रवार के दिन है। शनिदेव बहुत ही धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। 30 साल के बाद शनि स्वयं की राशि में गोचर हुए है फिर इसके बाद 11 मई को अपनी ही राशि में वक्री हुए हैं। शनि के वक्री होने पर इस बार शनि जयंती मनाई जा रही है। शनि के वक्री होने के कारण जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है तो उनके ऊपर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। शनि जयंती के मौके पर शनि के मंत्र के जाप करने से राशियों पर चल रहा बुरा प्रभाव कम हो सकता है।
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इन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती- धनु, मकर और कुंभ
इन राशियों पर शनि की ढैय्या - मिथुन और तुला
शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
शनि का वैदिक मंत्र
ऊँ शन्नोदेवीर- भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
तांत्रिक शनि मंत्र:
ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
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शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
सामान्य मंत्र-
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
शनि गायत्री मंत्र
ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्
शनिदोष से छुटकारा पाने के 7 महाउपाय
- हनुमान जी उपासना करें।
- गरीबों का दान करें।
- शनिवार के दिन शनि को तेल चढ़ाएं।
- उड़द दाल का दान करें।
- ब्राह्राणों को भोजन कराएं।
- पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीया जलाएं।
- काले कुत्ते को घी की रोटी खिलाएं।