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Shani Amavasya 2021: इस बार शनि अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक साथ, ये उपाय करने से आएगी सुख शांति

Wed, 01 Dec 2021 02:47 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 01 Dec 2021 02:47 PM IST
सार

Shani Amavasya 2021: इस बार साल का आखिरी ग्रहण 04 दिसंबर 2021 को लगने जा रहा है। इस बार सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या एक साथ है। इसलिए यदि ग्रहण और शनि अमावस्या के दौरान कुछ उपाय किए जाएं तो दोनों ही ग्रहों को अनुकूल किया जा सकता है। मान्यता है कि इन उपायों को करने से जीवन में सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तो चलिए जानते हैं उपाय। 

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Shani Amavasya 2021 date solar eclipse and Shani Amavasya combined on same date do these measures to get happiness and peace on Surya Grahan
शनि अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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Shani Amavasya 2021: 04 दिसंबर 2021 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन शनि अमावस्या भी है। ज्योतिष की दृष्टि से सूर्यग्रहण और शनि अमावस्या का एक ही दिन पड़ना अद्भुत संयोग है, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शनि देव को सूर्य का पुत्र कहा जाता है। यदि सूर्य और शनि दोनों ग्रह एक साथ प्रसन्न हों तो बहुत ही उत्तम रहेगा। इसलिए शनि और सूर्य दोनों के लिए दान करना आवश्यक है। शनि के प्रभाव से पीड़ित लोगों के लिए यह अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण है। इसी के साथ मान्यता है कि इस दिन दान करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है और हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 
ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर भी प्रभाव पड़ता है। वेदों और पुराणों के अनुसार सूतक चार प्रकार के होते हैं। जिनमें से एक ग्रहण का सूतक भी है। कहा जाता है कि ग्रहण का सूतक गंभीर परिणाम देता है। सूर्य और चंद्रमा के ग्रहण के कारण परिवर्तनशील राशियों को छोड़कर सभी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी को इस समय सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष दान और पूजा करनी चाहिए। इस बार सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या एक साथ है। इसलिए यदि ग्रहण और शनि अमावस्या के दौरान कुछ उपाय किए जाएं तो दोनों ही ग्रहों को अनुकूल किया जा सकता है। मान्यता है कि इन उपायों को करने से जीवन में सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तो चलिए जानते हैं उपाय। 

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Shani Amavasya 2021 date solar eclipse and Shani Amavasya combined on same date do these measures to get happiness and peace on Surya Grahan
सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या - फोटो : सोशल मीडिया

सूर्य ग्रहण का समय 
सूर्य ग्रहण की तिथि: 4 दिसंबर, शनिवार। 
सूर्य ग्रहण का आरंभ: प्रातः11:00 बजे से 
सूर्य ग्रहण समाप्त: दोपहर 03:07 मिनट पर

शनि अमावस्या तिथि और समय 
अमावस्या आरंभ:   दोपहर 04:55  से ( 3 दिसंबर, शुक्रवार )
अमावस्या समाप्त : प्रातः 01: 12 मिनट तक  ( 4 दिसंबर, शनिवार )

Shani Amavasya 2021 date solar eclipse and Shani Amavasya combined on same date do these measures to get happiness and peace on Surya Grahan
शनि अमावस्या 2021 - फोटो : अमर उजाला

आइए जानते हैं वो कौन से उपाय हैं जिनके माध्यम से घर में सुख शांति बनी रहेगी। 

इन चीजों का दान करें
शनि अमावस्या और ग्रहण के दौरान निम्नलिखित चीजों का दान करने से दोनों ग्रह प्रसन्न रहेंगे। इन दान में धन वृद्धि के लिए अनाज, शत्रुओं के अंत के लिए काले तिल, विपत्ति से सुरक्षा के लिए छाता, पूर्वजों से मुक्ति के लिए उड़द की दाल, शनि के प्रभाव से मुक्ति के लिए सरसों का तेल दान करना चाहिए।

शमी-पेड़ की पूजा करें 
शनिअमावस्या और ग्रहण के दिन शनि-दोष से छुटकारा के लिए शमी-पेड़ की पूजा करें। ग्रहण समपट होने के बाद शाम के वक्त इस पेड़ के नीचे सरसों का दीया जलाएं।  शनि अमावस्या के दिन इस उपाय से घर में सुख-शांति बनी रहती है।  साथ ही शनि के बुरे प्रभावों से भी छुटकारा मिलता है। 

शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं
शनिश्चरी अमावस्या के शुभ योग में सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद शनि मंदिर जाकर साफ-सफाई करें और शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं। नीले फूल अर्पित करें। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

शिव सहस्त्रनाम का पाठ करें
शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।

इस मंत्र का करें जाप
शनिदेव के प्रकोप को शांत करने के लिए यह मंत्र काफी प्रभावी है। शनिदेव को समर्पित इस मंत्र को श्रद्धा के साथ जपने से निश्चित रूप से आपको लाभ होगा।
सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।
मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।

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