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Solar Eclipse 2023: नवरात्रि से पहले लगेगा सूर्य ग्रहण, जानिए ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
Wed, 11 Oct 2023 02:31 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 11 Oct 2023 02:31 PM IST
सार
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि शुरू होने के ठीक एक दिन पहले यानी 14 अक्तूबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगेगा। यह आश्विन माह की अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण होगा। लेकिन इस सूर्य ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
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भारतीय समय के अनुसार 14 अक्तूबर की रात को करीब साढ़े आठ बजे से शुरू होगा
- फोटो : istock
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विस्तार
शक्ति आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि 15 अक्तूबर से शुरू हो रही है। नवरात्रि पर्व लगातार 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। लेकिन इस वर्ष शारदीय नवरात्रि शुरू होने के ठीक एक दिन पहले यानी 14 अक्तूबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगेगा। यह आश्विन माह की अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण होगा। लेकिन इस सूर्य ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। भारत में सूर्य ग्रहण नहीं होने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। भारतीय समय के अनुसार 14 अक्तूबर की रात को करीब साढ़े आठ बजे से शुरू होगा जिसका समापन रात 2 बजकर 25 मिनट पर होगा। साल का यह आखिरी सूर्यग्रहण अमेरिका और अफ्रीका के हिस्सों में दिखाई देगा।
ग्रहण की धार्मिक मान्यताएं
ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन जगहों पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता वहां पर ग्रहण के शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले सूतककाल शुरू हो जाता है। सूतक काल को शुभ नहीं माना जाता है। सूतक काल में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित होता है। 14 अक्तूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इस कारण से भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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सूतक काल में पूजा-पाठ करना वर्जित
धार्मिक नजरिए से सूतक काल को शुभ नहीं माना जाता है। ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ,नए काम की शुरुआत करना, गृह प्रवेश, मुंडन,जनेउ विवाह जैसे शुभ संस्कार नहीं किए जाते हैं। सूतक काल के शुरू होते हैं मंदिरों के परदे और दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। सूतक काल के दौरान लगातार मंत्रों का जाप करना होता है।
ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
- हिंदू मान्यताओं के अनुसार हमेशा सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर होता है जबकि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि पर होता है।
- ग्रहण लगने की मान्यताएं राहु से जुड़ी मानी जाती है। जिसमें जब राहु सूर्य और चंद्रमा का ग्रास करता है तो इसे ग्रहण कहते हैं।
- जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में रहते हैं और पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है। इससे सूर्य की आंशिक या पूर्ण रोशनी धरती पर नहीं आ पाती है और इसी घटना को सूर्यग्रहण कहते हैं।
सूर्य ग्रहण के बाद चंद्र ग्रहण भी
14 अक्तूबर को सूर्य ग्रहण लगने के बाद साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। यह चंद्र ग्रहण 28 अक्तूबर को पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। यह चंद्र ग्रहण आंशिक चंद्रग्रहण होगा। जिसे भारत में देखा जा सकता है। भारतीय समयानुसार 28 अक्तूबर की आधी रात 01बचकर 06 मिनट से 02 बजकर 22 मिनट तक चंद्रग्रहण लगेगा।
इस राशि और नक्षत्र में लगेगा सूर्य ग्रहण
हिंदू पंचांग के अनुसार साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण अश्विन माह की अमावस्या तिथि को कन्या राशि और चित्रा नक्षत्र में लगेगा।
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ग्रहण की धार्मिक मान्यताएं
ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन जगहों पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता वहां पर ग्रहण के शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले सूतककाल शुरू हो जाता है। सूतक काल को शुभ नहीं माना जाता है। सूतक काल में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित होता है। 14 अक्तूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इस कारण से भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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सूतक काल में पूजा-पाठ करना वर्जित
धार्मिक नजरिए से सूतक काल को शुभ नहीं माना जाता है। ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ,नए काम की शुरुआत करना, गृह प्रवेश, मुंडन,जनेउ विवाह जैसे शुभ संस्कार नहीं किए जाते हैं। सूतक काल के शुरू होते हैं मंदिरों के परदे और दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। सूतक काल के दौरान लगातार मंत्रों का जाप करना होता है।
ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
- हिंदू मान्यताओं के अनुसार हमेशा सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि पर होता है जबकि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि पर होता है।
- ग्रहण लगने की मान्यताएं राहु से जुड़ी मानी जाती है। जिसमें जब राहु सूर्य और चंद्रमा का ग्रास करता है तो इसे ग्रहण कहते हैं।
- जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में रहते हैं और पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है। इससे सूर्य की आंशिक या पूर्ण रोशनी धरती पर नहीं आ पाती है और इसी घटना को सूर्यग्रहण कहते हैं।
सूर्य ग्रहण के बाद चंद्र ग्रहण भी
14 अक्तूबर को सूर्य ग्रहण लगने के बाद साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। यह चंद्र ग्रहण 28 अक्तूबर को पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। यह चंद्र ग्रहण आंशिक चंद्रग्रहण होगा। जिसे भारत में देखा जा सकता है। भारतीय समयानुसार 28 अक्तूबर की आधी रात 01बचकर 06 मिनट से 02 बजकर 22 मिनट तक चंद्रग्रहण लगेगा।
इस राशि और नक्षत्र में लगेगा सूर्य ग्रहण
हिंदू पंचांग के अनुसार साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण अश्विन माह की अमावस्या तिथि को कन्या राशि और चित्रा नक्षत्र में लगेगा।
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