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इस रक्षाबंधन पर राशि अनुसार बांधे अपने भाईयों की कलाई पर राखी
ज्योतिषाचार्या डाo पुनीत गुप्ता
Updated Thu, 23 Aug 2018 01:19 PM IST
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इस बार राखी के दिन चंद्र व गुरु का गजकेशरी योग बन रहा है जो की सूर्योदय से लेकर देर रात्रि तक रहेगा। गुरु इस दिन तुला राशि में होंगे व चन्द्रमा कुम्भ राशि में होंगे इस कारण दोनों आपस में नवम पंचम रहेगे गुरु चंद्र यदि एक दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखे तो गजकेसरी योग निर्मित होता है। गजकेसरी योग में राखी बांधने से अटूट बंधन रहेगा, भाइयों को राजा के सामान सुख प्राप्त होगा। इस योग में राखी बांधने से लक्ष्मी जी की की कृपा प्राप्त होगी। ज्योतिषाचार्या डाo पुनीत गुप्ता के अनुसार राशि के अनुसार भाईयों को उस रंग की राखी बांधनी चाहिए। जिससे कि उनकी उम्र लंबी हो और उन्हें जीवन में हर तरह की सुख-शांति मिले।
राशि के अनुसार राखी का रंग
मेष, वृश्चिक : लाल रंग
वृषभ, तुला, कर्क : सफेद या सिल्वर रंग
मिथुन, कन्या : हरा रंग
सिंह : गुलाबी रंग या गोल्डन रंग की
धनु, मीन : पीला रंग
मकर, कुम्भ : नीला रंग
इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ हिन्दू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्म के लोग जैसे कि सिख, जैन और ईसाई भी हर्षोल्लास के साथ इसे मनाते हैं।
पुराणों के मुताबिक राखी का त्योहार
इंद्र की पत्नी ने इंद्र को ही राखी बांधी थी। यम को उनकी बहन यमुना ने । लक्ष्मी जी ने राजा बली को। द्रौपदी ने कृष्ण के हाथ में चोट लगने पर साड़ी का पल्लू बांधा था और इस पर्व पर वचन लिया। चीरहरण के समय भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की। चित्तौड़ की महारानी करमावती ने हुमायूं को चांदी की राखी भेजी थी। सिकंदर को राजा पुरु की पत्नी ने राखी बांधी थी। सामाजिक संस्थाओं से संबद्ध महिलाएं , पुलिस कर्मियों, सैनिकों ,जवानों और राजनेताओं को आधुनिक युग में बांध रही हैं।
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राशि के अनुसार राखी का रंग
मेष, वृश्चिक : लाल रंग
वृषभ, तुला, कर्क : सफेद या सिल्वर रंग
मिथुन, कन्या : हरा रंग
सिंह : गुलाबी रंग या गोल्डन रंग की
धनु, मीन : पीला रंग
मकर, कुम्भ : नीला रंग
इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ हिन्दू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्म के लोग जैसे कि सिख, जैन और ईसाई भी हर्षोल्लास के साथ इसे मनाते हैं।
पुराणों के मुताबिक राखी का त्योहार
इंद्र की पत्नी ने इंद्र को ही राखी बांधी थी। यम को उनकी बहन यमुना ने । लक्ष्मी जी ने राजा बली को। द्रौपदी ने कृष्ण के हाथ में चोट लगने पर साड़ी का पल्लू बांधा था और इस पर्व पर वचन लिया। चीरहरण के समय भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की। चित्तौड़ की महारानी करमावती ने हुमायूं को चांदी की राखी भेजी थी। सिकंदर को राजा पुरु की पत्नी ने राखी बांधी थी। सामाजिक संस्थाओं से संबद्ध महिलाएं , पुलिस कर्मियों, सैनिकों ,जवानों और राजनेताओं को आधुनिक युग में बांध रही हैं।
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