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रक्षाबंधन 2018 : किस रक्षासूत्र के बगैर अधूरी है भाई की कलाई और कौन सा मंत्र-मुहूर्त है सर्वश्रेष्ठ

Sun, 26 Aug 2018 08:54 AM IST
पं. जयगोविंद शास्त्री
पं. जयगोविंद शास्त्री Updated Sun, 26 Aug 2018 08:54 AM IST
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Raksha bandhan 2018 date, time and importance of Raksha Sutra
rakhi
रक्षाबंधन के दिन भाई के कलाई पर रक्षासूत्र बांधने का बहनों को बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत कब और कैसे हुई? यदि आप इसे राजा बलि और माता श्रीमहालक्ष्मी की कथा से जोड़कर देखते हैं तो आपकी जानकारी अधूरी है। 
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राखी बांधने का शुक्लयजुर्वेदीय मंत्र

ॐ त्र्यायुषम् जमदग्ने: कश्यपस्य त्र्यायुषम्। यद्देवेषु त्र्यायुषम् तन्नो अस्तु त्र्यायुषम्।।

हे रुद्ररूपी गुरुदेव! महर्षि जमदग्नि के बाल्यकाल, यौवनकाल, वृद्धावस्थाकाल की जो आयु है तथा कश्यप ऋषि की जो त्रिकाल आयु है एवं इंद्रादि देवों की जो आयु बतायी गयी है, उतनी आयु हमारी होवें। साथ ही जमदग्नि, कश्यप आदि सप्तऋषियों के गुण के समान गुण हमारे चरित्र में आवें। हम गुणी और आयुष्मान बने आपसे हमारी यही प्रार्थना हैंं।
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वैदिक काल से बांधा जाता रहा है रक्षासूत्र
शुक्लयजुर्वेद मंत्र के अनुसार रक्षाबंधन घटनाक्रम के पहले से ही श्रावण पूर्णिमा के दिन ब्रह्मऋषियों के निमित्त किए जाने वाले तर्पण की परंपरा चली आ रही है। गुरु परंपरा के अनुसार इस दिन सभी सनातनधर्मियों, वैदिक गुरुओं अपने शिष्यों के साथ समुद्र, नदी, सरोवर आदि के आस-पास बैठकर अपामार्ग (चिचड़ा) से दातून करके पंचगब्य (गौ का दूध, गौ का दही, गौ का घी, गोमूत्र और गौ का गोबर।)द्वारा अपनी दैहिक और आत्मशुद्धि किया करते हैं। 
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कुतप बेला में देते हैं सूर्याअर्घ्य
स्नान-ध्यान के बाद शिष्यगण सप्तऋषियों (वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज।) के लिए तर्पण और सूर्याअर्घ्य देते हैं और इसका सबसे परम शुभ मुहूर्त कुतप बेला को माना गया है। कुतप बेला लगभग दोपहर के आस-पास अभिजित मुहूर्त तक रहती है। इन्हीं के आधार पर अश्विन कृष्णपक्ष में ब्राह्मण भोजन, पिंडदान, तर्पण आदि भी कुतप बेला में करना श्रेष्ठ माना गया है। 

इन ऋणों से मुक्ति के लिए करते हैं तर्पण
जीवात्मा का जब पृथ्वी पर आगमन होता है तो उसे मूल रूप से देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण से मुक्त होना पड़ता है। इसी ऋषिऋण के उपलक्ष्य में श्रावण पूर्णिमा उपाकर्म के पश्चात् तर्पण किया जाता है। 

गुरुकृपा के लिए बंधवाते हैं रक्षासूत्र
अपने गुरु से रक्षा सूत्र बंधवाते समय गायत्री मंग का जाप करते हुए शिष्य हुए यही प्रार्थना करते हैं कि गुरुदेव आपका आशीर्वाद हम पर सदा बना रहे। भारत के उत्तर पूर्व राज्यों में इस दिन कुलपुरोहित अपने यजमानों के घर-घर जाकर पूरे परिवार को रक्षा सूत्र बांधते हुए यजमान के कल्याण की कामना करते हैं और यजमान भी अपने कुलपुरोहित का यथोचित पूजन, आदर, सत्कार कर दान दक्षिणा देते हैं। 


चक्रसुदर्शन मुहूर्त में श्रेष्ठ रहेगा राखी बांधना
भारत वर्ष में सामान्यत: अभिजित मुहूर्त का समय दोपहर 11:36 मिनट से 12:24 मिनट तक होता है लेकिन अलग-अलग जगहों के अक्षांश रेखांश के अनुसार यह समय कुछ आगे-पीछे रहता है। दिन-रात के तीस मुहुर्तों में सर्वश्रेष्ठों में से एक चक्रसुदर्शन मुहुर्त (अभिजित) पृथ्वी पर स्पर्श करता है। इस मुहुर्त में किए जाने वाले किसी भी तरह के धर्मानुष्ठान कार्य आदि सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए स्वयं नारायण के चक्र सुदर्शन पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। इसलिए इसे अभिजित के अतिरिक्त चक्रसुदर्शन मुहूर्त भी कहते हैं। इसीलिए पुराणों में इसे अभिजित के अतिरिक्त चक्रसुदर्शन मुहूर्त भी कहा गया है। अत: इस मुहूर्त में किया गया कार्य कभी निष्फल नहीं होता। बहनों से निवेदन है कि भाईयों की कलाई में राखी बांधने के लिए इस मुहूर्त में राखी बांधने का प्रयत्न करें। 
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