देवगुरु बृहस्पति का मकर राशि में गोचर से बना गुरु-शनि नीचभंग योग, जानिए इसका प्रभाव
गुरु और शनि दोनों विशाल ग्रहों के एक साथ एक महत्वपूर्ण मकर राशि में आने से आध्यात्मिक जगत में भी बड़े परिवर्तन की संभावना बनती है।
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हमारे जीवन में जो कुछ भी महत्वपूर्ण है, चाहे वह हमारा दृष्टिकोण हो, संपत्ति, परिवार, सन्तान, विद्यार्जन हो या फिर गुरु का स्थान। इन सभी का जो प्रतीकात्मक ग्रह है वह गुरु ग्रह हैं। जब गुरु मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो हमारी सोच में थोड़ी संकीर्णता आ जाती है और हम दूर का नहीं सोच पाते। 20 नवंबर 2020 को देवगुरु बृहस्पति राशि परिवर्तन कर धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर पृथ्वी तत्व की मूलभूत नकारात्मक राशि है और इसके स्वामी शनि हैं। ऐसी मान्यता है कि इस राशि में गुरु अपना सम्पूर्ण शुभ फल नहीं दे पाते। इस कारण से इस समय कहीं पर भी किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहिए।
शनि गुरु की युति जो मकर राशि में हो रही है वह इससे पहले 1960 में हुई थी। हमने देखा है किस तरह से 1960 के बाद हमारे देश व संसार में अनेक परिवर्तन हुए। तो अब क्योंकि यह घटना फिर से घटने वाली है तो एक बड़े परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है।
जहां गुरु विस्तार का प्रतीक है वहीं शनि संकुचन का प्रतीक है। स्वयं पर अंकुश लगाने का यह बहुत अच्छा समय है। अगर आप लगातार अपने व्यापार में बढ़ रहे हैं या अपनी नौकरी में बहुत अच्छी तरक्की कर रहे हैं तो यह समय है, अपनी गति कम कर स्वयं का मूल्यांकन करें। स्वाध्याय के लिए भी यह बहुत अच्छा समय है। जो लोग शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े हैं उनके लिए भी यह समय अच्छा है, हालांकि शिक्षक, प्राध्यापक या किसी भी तरह के प्रशिक्षक के लिए गुरु का नीच राशि में आना अच्छा समय नहीं होता अर्थात आपका जो वर्चस्व है, हो सकता है उसमें थोड़ी कमी आए, पर आप इस कमी की पूर्ति मेहनत और वैराग्य द्वारा कर सकते हैं।
यदि आप उद्योगपति हैं तो भी यह समय विस्तार करने का नहीं बल्कि यह जांचने का है कि आपके उद्योग, संस्था, व्यापार में नैतिक मूल्यों का पालन तो भली प्रकार किया जा रहा है। अपने कर्मचारियों का थोड़ा ख्याल रखने का समय भी है। गुरु धर्म और शनि कर्म के कारक हैं तो गुरु शनि का मकर राशि में आना एक उच्च कोटि का धर्मकर्माधिपती का योग बनाता है। अगर आप धर्म कार्य में बहुत सजग हैं, तो यह उसके लिए यह उत्तम समय रहेगा।
गुरु और शनि दोनों विशाल ग्रहों के एक साथ एक महत्वपूर्ण मकर राशि में आने से आध्यात्मिक जगत में भी बड़े परिवर्तन की संभावना बनती है। आध्यात्मिक भाषा में समझाया जाए तो गुरु ज्ञान के, शनि वैराग्य के और सूर्य तप के कारक है। ऐसे में ज्ञान, वैराग्य और तप से आत्मबोध करने के लिए यह बहुत ही उत्तम समय है। ऐसा कहा जाता है कि जो काम मृत्यु के पश्चात यम करते हैं वही काम जीवन में नियम करते हैं। स्वयं को नियमों से बांधने पर इस ग्रह गति का आप पर कुछ विशेष असर नहीं पड़ेगा।
मकर राशि एक पृथ्वी तत्व प्रधान राशि है। आने वाला समय एक तरह से कृषि क्रान्ति का भी समय हो सकता है। इस महायुति के बाद अचल संपत्ति, कृषि, खनन उद्योग के अलावा जो भी उद्योग पृथ्वी तत्व से जुड़े हुए है इन सबका सही मूल्यांकन होकर वास्तविक स्तर पर आने की बहुत सकारात्मक उम्मीद लगती है। ये एक चर राशि भी है तो कुछ देशों की जो सीमाओं में परिवर्तन आ सकता है। यह बात केवल एक या दो वर्षों की नहीं है, क्योंकि ये घटना वर्षों में एक बार होती है। इसे एक तरह से प्रकृति की आने वाले भविष्य की विस्तृत योजना समझ सकते हैं।
लेखक: आशुतोष चावला, प्रमुख ज्योतिष और वास्तु विभाग वैदिक धर्म संस्थान आर्ट ऑफ लिविंग