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ज्योतिष और अध्यात्म में क्या है सूर्य उपासना का महत्व, सूर्य के बारे में जानिए सबकुछ

पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 12 Apr 2020 12:38 AM IST
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किसी भी जातक की जन्मकुंडली में अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सभी ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं।
किसी भी जातक की जन्मकुंडली में अकेले सूर्य ही बलवान हों तो सभी ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं।

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जगतात्मा के रूप में अवस्थित सूर्य काल गणना एवं फलित ज्योतिष के भी मूल तत्व हैं। आदिकाल में इनके पास सभी 12 राशियाँ थीं किन्तु कालान्तर में इन्होंने सिंह राशि अपने पास रखा और कर्क राशि चंद्रमा को प्रदान कर दी तथा अन्य ग्रहों को दो-दो राशियाँ बाँट दी। वर्ष में 6 माह उत्तरायण और 6 माह दक्षिणायन की यात्रा पर रहते हैं। किन्तु इनकी दक्षिणायन की यात्रा के समय देवप्राण भी क्षीण पड़ने लगते हैं और आसुरी शक्तियों का वर्चस्व बढ़ जाता है इसीलिए इस अवधि के मध्य सूखा-बाढ़, फसलों के रोग, पशुओं की बीमारी और अन्य नानाप्रकार के रोग प्राणियों के सताने लगते हैं। इनके उत्तरायण को देवतावों का दिन और दक्षिणायन को दैत्यों का दिन माना गया है। 
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