असुरों के गुरु शुक्र 5 दिसंबर की शाम को मृत्युलोक के दंडाधिकारी शनि देव की राशि मकर में प्रवेश कर गए, इस प्रकार दोनों ही एक दूसरे के घर में पहुच गए। इससे राशि राशि परिवर्तन योब बना है। शनि-राहू तो पहले से ही शुक्र की राशि तुला में बैठे थे, अब शुक्र भी शनि की राशि मकर में बैठकर 'अन्योन्याश्रित' योग का निर्माण कर रहे हैं।
यह योग जहां सभी जातकों के लिए अधिक उतार-चढ़ाव वाला सिद्ध होगा, वहीं तुला, मकर और कुम्भ राशि वाले जातकों के लिए अति लाभदायक फल देगा। इनराशि के जातकों के लिए तो यह योग किसी वरदान से कम नहीं है, लेकिन शासन सत्ता के लिए यह योग अप्रत्याशित परिणामों वाला काल
सिद्ध होगा।
पढ़ें, लहसुनिया रत्न धारण करने से पहले जानें यह बातें इस वर्ष के मंत्री शनिदेव हैं, इसलिए बहुत से लोगों को जेल की हवा खाना पड़ेगी और बहुतों को तो अपने पद से त्यागपत्र भी देना पड़ेगा। अब शुक्र-शनि के द्वारा बनने वाले इस योग के फलस्वरूप केंद्र सरकार के कुछ मंत्री भी इसी दंड के भागीदार होने वाले हैं, शनिदेव न्याय के देवता हैं और राहू के साथ होने से उनका बल और भी बढ़ गया है।
आने वाले महीनों तक जब तक शुक्र का वक्री-मार्गी का खेल चलेगा, तब तक ऐसा ही होता रहेगा। यह योग 6 जनवरी तक बना रहेगा अतः केंद्र सरकार के लिए एक-एक दिन काल के ग्रास की तरह है। 21 दिसंबर को शुक्र वक्री होकर 6 जनवरी तक पुनः धनु राशि मे आ जाएंगे। जहां से 25 फरवरी से पुनः मकर राशि मे प्रवेश करके 'शनिदेव के साथ एकबार फिर 'अन्योन्याश्रित' योग का निर्माण करेंगे।
पढ़ें, शिवाजी के गुरू को कैसे कृष्ण में दिखे राम और राधा में सीताजो 27 अप्रैल तक बना रहेगा। यह योग भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों के लिए अभिशाप है। आप देखेंगे कि न्यायपालिका इतने कठोर-कठोर दंडात्मक निर्णय लेगी कि सरकार भी हिलने लगेगी इसलिए कईयों के घर का पता अब तिहाड़ जेल होने वाला है। स्टॉक मार्केट के लिए यह योग खुशखबरी लेकर आ रहा है।
पढ़ें, शुक्र रेखा, मिलेगा वैवाहिक सुख या रहेगी धन की परेशानीविशेषकर कमोडिटी मार्केट सोने-चांदी एवं खाद्य पदार्थ के क्षेत्र में बेहतरीन लिवाली दिखेगी। यह योग मेष, बृषभ, कन्या, तुला, धनु, मकर और कुम्भ राशि वालों के लिए अधिक शुभ रहेगा। इन राशियों के जातक जितनी ईमानदारी बरतेगे, उतनी ही तरक्की करेंगें। कर्क, सिंह, बृश्चिक, और मीन राशि के जातकों के लिए समय सामान्य ही रहेगा।
इस योग के अशुभ प्रभाओं से बचने के लिए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप अथवा शनिदेव का अभिषेक अत्यंत शुभ रहेगा।