शनि धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह आपकी राशि में नहीं आएंगे। धीमे धीमे ही सही यह हर किसी की राशि में आते हैं। और जब शनि आते हैं तो अगले-पिछले सारे कर्मों का हिसाब करते हैं।
अपना काम पूरा करने के बाद शनि दूसरी राशि में चले जाते हैं। इस साल भी यही होने जा रहा है। 15 नवंबर 2011 से तुला राशि में चल रहे शनि महाराज 2 नवंबर को तुला से निकलकर वृश्विक में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि, शनि के इस राशि में पहुंचने से बीते लगभग सात सालों से साढ़ेसाती के प्रभाव में चल रहे कन्या राशि के व्यक्तियों को शनि के प्रभाव से मुक्ति मिल जाएगी लेकिन धनु राशि वालों की साढ़ेसाती शुरु हो जाएगी।
इसी तरह कर्क और मीन राशि के व्यक्तियों को शनि की ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति मिल जाएगी लेकिन सिंह और मेष राशि वाले ढैय्या के प्रभाव में आ जाएंगे।
इसलिए धनु, मेष और सिंह राशि के व्यक्तियों को शनि की प्रसन्नता के लिए शनि के मंत्रों का जप एवं दशरथ स्तोत्र का पाठ शुरु कर देना चाहिए।
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